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China-US Row: चीन का अमेरिका के साथ हथियार नियंत्रण वार्ता करने से इनकार, ताइवान को शस्त्र बेचने का लगाया आरोप

Wed, 17 Jul 2024 07:42 PM IST
मिथिलेश नौटियाल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

चीन ने अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण हथियार नियंत्रण वार्ता को निलंबित कर दिया है। दरअसल, चीन ने अमेरिका पर ताइवान को हथियार बेचने का आरोप लगाया है।
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शी जिनपिंग - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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चीन और अमेरिका के बीच ताइवान को लेकर रिश्तों में तल्खी देखने को मिल रही है। अब चीन ने अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण हथियार नियंत्रण वार्ता को निलंबित कर दिया है। दरअसल, चीन ने अमेरिका पर ताइवान को हथियार बेचने का आरोप लगाया है। 

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अमेरिका पर ताइवान को हथियार बेचने का आरोप
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि अमेरिका द्वारा स्व-शासित ताइवान को लगातार हथियार मुहैया कराए जा रहे हैं। जियान के मुताबिक अमेरिका लगातार ताइवान को घातक हथियार बेच रहा है।  चीन ने ताइवान को विद्रोही देश करार दिया है। चीन ताइवान पर अपना दावा करता आया है। चीन का कहना है कि बलपूर्वक ही सही, ताइवान को मुख्य भूमि में शामिल किया जाना चाहिए।

‘इस स्थिति के लिए अमेरिका ही जिम्मेदार’
लिन जियान सिर्फ यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने दोनों देशों के बीच हथियार नियंत्रण वार्ता के लिए आवश्यक राजनीतिक माहौल को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि चीन ने पहले भी इस बात का विरोध किया था। लिन ने कहा, ‘चीन ने तय किया है कि अमेरिका के साथ हथियार नियंत्रण वार्ता नहीं की जाएगी। अमेरिका ही इस स्थिति के लिए पूरा जिम्मेदार है।’ चीन ने स्पष्ट रूप से वार्ता में व्यवधान के लिए अमेरिका पर दोष मढ़ा है।
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‘अमेरिका को चीन के आंतरिक मामलों का सम्मान करना चाहिए’
लिन जियान ने आगे कहा कि चीन इस मामले में अमेरिका के साथ बातचीत को जारी रखना चाहता था। उन्होंने आगे कहा कि दोनों पक्षों में बातचीत के लिए अमेरिका को चीन के आंतरिक मामलों का भी सम्मान करना चाहिए। इस तरह से दोनों पक्षों के बीच विचारों का आदान-प्रदान हो सकता था। आपको बता दें कि कोविड प्रतिबंधों के खत्म होने के बाद चीन और अमेरिका के बीच हथियारों और परमाणु कार्यक्रमों के नियंत्रण को लेकर बातचीत शुरू हुई थी।

उधर, बीते कुछ समय से चीन के विरोध के बावजूद, अमेरिका ने ताइवान को उच्च तकनीक के हथियार मुहैया कराए हैं। दरअसल अमेरिका द्वारा ताइवान की स्वायत्तता का समर्थन किया जाता है। इसके अलावा अमेरिका द्वारा एक चीन नीति (One China policy) के लिए भी प्रतिबद्धता जताई गई है। 

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