ये बात आज पूरी दुनिया में मानी जाती है कि एआई के क्षेत्र में अमेरिका और चीन के बीच होड़ बढ़ती जा रही है। अब ऐसा 2020 में पहली बार हुआ जब इस क्षेत्र में चीन में हुए अनुसंधानों का हवाला अमेरिका में हुए रिसर्च से ज्यादा बार दिया गया। अमेरिका की स्टेनफॉर्ड यूनिवर्सिटी में हुए एक अध्ययन के मुताबिक अकादमिक दस्तावेजों में चीन में हुए रिसर्च के उद्धरण का प्रतिशत 20.7 रहा। जबकि अमेरिकी रिसर्च के उद्धरण का प्रतिशत 19.8 ही रहा।
एक ब्रिटिश अनुसंधान विशेषज्ञ के मुताबिक 2012 के बाद से चीन में एआई के बारे में हर साल लगभग दो लाख 40 हजार रिसर्च पेपर तैयार होते हैं, जबकि अमेरिका में ये संख्या लगभग एक लाख 50 हजार ही रही है। जानकारों का कहना है कि अब खासकर इमेज रिकॉग्निशन के मामले में चीन में हो रहे रिसर्च उच्च गुणवत्ता के हैं।
एआई के विकास के लिए बड़े पैमाने पर मानव और वित्तीय संसाधनों की जरूरत होती है। टोक्यो मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर भाषा के विशेषज्ञ और प्रोफेसर मामोरू कोमाची ने कहा कि गिने-चुने देश ही ऐसे हैं, जिनके पास ये संसाधन मौजूद हैं। चीन ने ऐसे कई संस्थान और कंपनियां तैयार की हैं, जिनके पास ऐसे संसाधन हैं। उन संस्थानों में शिनहुआ यूनिवर्सिटी, पीकिंग यूनिवर्सिटी, चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज, बायदू और शाओमी शामिल हैं। पर्यवेक्षकों के मुताबिक अब तक एआई के क्षेत्र में अमेरिका ही आगे है। लेकिन चीन की बढ़ रही ताकत भी धीरे-धीरे साफ होती जा रही है।