देश में बढ़ती आर्थिक मुसीबतों के बीच श्रीलंका सरकार हर संभव दरवाजे पर हाथ फैला रही है। पिछले हफ्ते श्रीलंका के वित्त मंत्री बासिल राजपक्षे ने भारत की यात्रा की थी। इस दौरान भारत सरकार ने श्रीलंका को एक बिलियन डॉलर का कर्ज देने का एलान किया। अब खबर है कि चीन श्रीलंका को 1.5 बिलियन डॉलर नया कर्ज देने पर विचार कर रहा है। इस बारे में जल्द फैसला होने की संभावना है। इस कर्ज के लिए अनुरोध श्रीलंका सरकार ने किया है।
इसी बीच कोलंबो स्थित चीन के राजदूत ची झेनहोंग ने सोमवार को बताया कि चाइना डेवलपमेंट बैंक ने श्रीलंका को 50 करोड़ डॉलर का कर्ज देने की पेशकश की है। इसके अलावा एक बिलियन डॉलर के कर्ज के श्रीलंका सरकार के अनुरोध पर चीन विचार कर रहा है।
जानकारों के मुताबिक श्रीलंका को इस साल लगभग चार बिलियन डॉलर का कर्ज चुकाना है। जबकि फरवरी के अंत तक उसके विदेशी मुद्रा भंडार में सिर्फ 2.31 बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा थी। श्रीलंका के एक अरब बिलियन डॉलर के सॉवरेन बॉन्ड इस साल जुलाई में मैच्योर होने वाले हैं। यानी इतनी रकम का उसे बॉन्ड धारकों को भुगतान करना होगा।
राजदूत ची से पूछा गया कि क्या श्रीलंका की इस विकट स्थिति को देखते हुए चीन अपने कर्ज को चुकाने की समयसीमा में राहत देने पर विचार कर रहा है। उस पर ची ने कहा- ‘हमारा अंतिम मकसद समस्या को हल करना है। लेकिन ऐसा करने के अलग-अलग तरीके हो सकते हैं।’ चीन श्रीलंका के लिए चौथा सबसे बड़ा कर्जदाता है। पहले तीन नंबर पर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान, एशियन डेवलपमेंट बैंक, और जापान हैं।