चीन की संसद में नेशनल पीपुल्स कांग्रेस ने हांगकांग पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब इस विधेयक को चीन के वरिष्ठ नेतृत्व के पास भेजा जाएगा। इस नए कानून के लागू हो जाने से हांगकांग अपनी स्वायत्ता खो सकता है और हांगकांग का विशेष दर्जा खत्म हो जाएगा।
साल 1997 में ब्रिटेन ने जब हांगकांग चीन को सौंपा था तब कुछ कथित कानून बनाए गए जिसके तहत हांगकांग में कुछ खास तरह की आजादी थी जो आम चीनी लोगों को हासिल नहीं है। चीन का यह प्रस्ताव इतना विवादित है कि संसद से मंजूरी मिलने के बाद दुनियाभर में कई देश चीन के खिलाफ बोलते नजर आ रहे हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात के संकेत दे दिए हैं कि अगर यह कानून लागू हो जाएगा तो अमेरिका और हांगकांग के बीच होने वाले विशेष व्यापार का अंत हो सकता है। विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा कि प्रशासन का ऐसा मानना है कि चीन के कानून लागू होने के बाद हांगकांग अपनी स्वतंत्रता खो देगा।
इस नए कानून के खिलाफ हांगकांग में काफी पहले से विरोध प्रदर्शन चल रहा है। इससे पहले बुधवार को सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच कई झड़पें हुई। बुधवार के दिन हांगकांग में सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया और 24 मई के दिन भी हांगकांग में प्रदर्शन जारी था।
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि बुनियादी कानून के तहत जो आजादी और कानूनी हक दिए गए है उससे हांगकांग के लोगों पर खासा असर नहीं पड़ेगा। ये कानून एक देश, दो सिस्टम वाली व्यवस्था को बरकरार रखने में मदद करेगा।
पिछले कुछ दिनों से चीन के नए कानून और हांगकांग की स्वायत्ता को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। कहीं विरोध प्रदर्शन तो कहीं आंसू गैस के गोले दागे जा रहे हैं। आखिर हांगकांग का मुद्दा आजकल क्यों इतना गर्माया हुआ है, ये जानने के लिए समझते हैं कि इस कानून का असर हांगकांग पर कितना पड़ेगा...