प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को एक अच्छा दोस्त बताते हुए चीन ने सोमवार को इस बात की उम्मीद जताई है कि दोनों नेता शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर अमेरिका के साथ अपने व्यापार को लेकर बातचीत करेंगे। ये बैठक इस सप्ताह बिश्केक में 13 से 14 जून को होने वाली है।
ये भारत में आम चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बाद दोनों नेताओं के बीच होने वाली पहली बैठक होगी। इस दौरान दोनों नेता द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत करेंगे। शी ने पीएम मोदी को एक खत के जरिए 23 मई को जीत के लिए बधाई दी थी।
पीएम मोदी और शी की बैठक को लेकर पूछे गए सवाल पर चीन के विदेश मंत्री जांग हनहुई ने कहा, "एक बार फिर हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देते हैं। राष्ट्रपति शी और पीएम मोदी अच्छे दोस्त हैं। दोनों के बीच बीते साल वुहान में एक सफल औपचारिक सम्मेलन भी हुआ था।"
उन्होंने कहा कि वुहान शिखर सम्मेलन ने भारत-चीन संबंधों के विकास के लिए एक तरह से रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान किया है। जिससे लंबे समय के लिए चीन-भारत संबंधों के स्थिर विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ है। दोनों नेताओं के बीच 27-28 अप्रैल को वुहान शिखर सम्मेलन हुआ था। साल 2017 में करीब 73 दिनों तक चले डोकलाम विवाद के दौरान दोनों देशों के संबंधों में कुछ खटास आ गई थी। लेकिन वुहान सम्मेलन से रिश्तों में सुधार हुआ।
वुहान सम्मेलन के बाद दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में संबंधों को सुधारने की कोशिश की जिसमें सैन्य-से-सैन्य संबंध भी शामिल हैं। जब जांग से एससीओ से इतर दोनों नेताओं के बीच होने वाली बैठक के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "बैठक से संबंधित जानकारी पर अभी चर्चा चल रही है, मेरा मानना है कि राष्ट्रपति शी और प्रधानमंत्री मोदी के बीच होने वाली हर द्विपक्षीय बैठक बहुत महत्वपूर्ण है।"
उन्होंने यह भी कहा कि चीन-अमेरिका व्यापार युद्ध और अमेरिका और भारत के बीच उभरते व्यापार संघर्ष दोनों नेताओं के बीच चर्चा का महत्वपूर्ण विषय है। बता दें चीन और अमेरिका के बीच बीते एक साल से व्यापार युद्ध चल रहा है। जिसका दायरा बढ़ते-बढ़ते चीनी कंपनी हुवावे तक आ पहुंचा है।
चीनी अधिकारियों का कहना है कि भारत भी अमेरिका की ओर से व्यापार को लेकर परेशानियों का सामना कर रहा है। हाल ही में अमेरिका ने भारत को जीएसपी देशों की सूची से बाहर कर दिया है। चीन चाहता है कि भारत भी ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों के खिलाफ लड़ाई में शामिल हो।
जांग ने आगे कहा, "व्यापार संरक्षणवाद और एकतरफावाद बहुत बढ़ रहा है। अमेरिका की ऐसी नीतियों का जवाब कैसे दें? यह ना केवल चीन के लिए एकअहम सवाल है बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका प्रभाव पड़ता है।"