चीन के इसमें शामिल होने का विचार सबसे पहले मई 2020 में चीन के प्रधानमंत्री ली कीचियांग ने सामने रखा था। उसके पहले अप्रैल में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के जापान जाने का कार्यक्रम था। लेकिन ये यात्रा कोरोना महामारी के कारण रद्द हो गई। अमेरिका से चीन के बिगड़ते संबंधों के बीच शी की प्रस्तावित जापान यात्रा को बहुत अहमियत दी जा रही थी। उस समय तक चीन ने सीपीटीपीपी में शामिल होने का इरादा नहीं जताया था। पर्यवेक्षकों के मुताबिक चीन को यह मालूम था कि उसके ऐसा इरादा जताने से जापान के लिए असहज स्थिति पैदा होगी।
लेकिन उसके बाद से जापान से भी चीन के रिश्ते अधिक तनावपूर्ण होते गए हैं। इसी बीच पिछले साल नवंबर में शी ने सीपीटीपीपी में शामिल होने का एलान कर दिया। अब उसके लिए औपचारिक अर्जी चीन ने दे दी है। जानकारों का कहना है कि निकट भविष्य में चीन को इस मुक्त व्यापार समझौते में प्रवेश मिलने की कोई संभावना नहीं है। इसे जानते हुए भी चीन ने अर्जी दी है, तो उसका अर्थ यही समझा गया है कि वह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों में दरार डालना चाहता है।
अभी सीटीपीपीपी में 11 सदस्य हैं। ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई, कनाडा, जापान, मलेशिया, मेक्सिको, न्यूजीलैंड, पेरू, सिंगापुर और वियतनाम इसके सदस्य हैं। ब्रिटेन ने भी इसमें शामिल होने के लिए अर्जी दे रखी है। बताया जाता है कि सदस्य देशों के बीच कई ऐसे हैं, जो चीन को इस करार में शामिल करने का उत्साह से समर्थन करेंगे। लेकिन जिया ने निक्कई एशिया से कहा कि इससे जापान के लिए कठिन स्थिति बनेगी। पर्यवेक्षकों के मुताबिक चीन ने ऐसी ही हालत पैदा करने के लिए ये अर्जी दी है।