जलवायु परिवर्तन को लेकर कुछ महीने पहले सामने आई इंटर गवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) की रिपोर्ट में इसे 'मानवता के लिए खतरनाक स्थिति' बताया गया है। रिपोर्ट बताती है कि 1970 से अब तक वैश्विक सतह के तापमान में जितनी वृद्धि हुई है, वह पिछले 2000 साल में किसी भी अन्य 50 वर्ष के कालखंड की तुलना में अधिक है।
वैश्विक तापमान में यह बढ़ोतरी 'पहले से ही दुनिया भर के हर क्षेत्र में मौसम और जलवायु संबंधी कई चरम स्थितियों को प्रभावित कर रही है। हम दुनिया के हर हिस्से में जलवायु परिवर्तन के असर देख रहे हैं। हमारे कार्यों के जरिए पैदा होने वाले जलवायु परिवर्तन के कारण लू, तूफान, आगजनी, बाढ़ और भूस्खलन की संख्या और तीव्रता में तेज वृद्धि हो रही है।
रिपोर्ट में कहा गया था कि जलवायु परिवर्तन न केवल जीवन और आजीविका को प्रभावित करता है, यह 21वीं सदी के सबसे बड़े स्वास्थ्य खतरों में से एक है। बढ़ते तापमान और अनियमित वर्षा ने कृषि को प्रभावित किया है। यानी यह पोषण को भी प्रभावित करता है। इसलिए केंद्र तथा राज्यों की सरकारों को अपने पोषण कार्यक्रमों में और तेजी लानी चाहिए।