चीन मौजूदा समय में बिजली संकट का सामना कर रहा है, जिससे उसे अपने कारखानों के संचालन, बिजली की खपत कम करने और कुछ प्रांतों में ब्लैकआउट घोषित करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में कुल 31 प्रांतों में से 20 प्रांत बिजली की किल्लत से जूझ रहे हैं। इस संकट से कारण दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के उद्योग क्षेत्र पर गहरा प्रभाव पड़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या कोरोना के कारण मंदी के बाद चीनी कारखानों से बिजली की मांग में एकाएक बढ़ोतरी के कारण सामने आई है। इस बीच चीन के पावर ग्रिड ऑपरेटर ने ऊर्जा संकट से इनकार करते हुए राष्ट्रीय पावर ग्रिड को अपग्रेड करने और सामान्य बिजली आपूर्ति की गारंटी देने का वादा किया है। चाइना साउथ ग्रिड ने बताया कि बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी औद्योगिक उपयोगकर्ताओं के लिए है और यह आवासीय बिजली के उपयोग पर लागू नहीं होगी।
औद्योगिक उत्पादन में गिरावट
चीनी पत्रिका के मुताबिक, इस मुसीबत का एक कारण यह भी है कि चीन आज भी कोयले पर अत्यधिक निर्भर है, जो देश की बिजली उत्पादन का 70 प्रतिशत प्रदान करता है। चीन में कोरोना के मद्देनजर लगाए गए लॉकडाउन से उबरने के बाद पहली बार सितंबर में ऊर्जा संकट के कारण औद्योगिक उत्पादन में गिरावट आई है। वहीं ग्लोबल टाइम्स ने बताया कि बिजली की इस कमी से आने वाले महीनों में औद्योगिक उत्पादन घटने का भी खतरा बढ़ गया है। चीनी मीडिया के कुछ वर्गों ने सरकार से इस संकट का हल निकालने के लिए जलवायु लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाने का आह्वान किया है।