दुनिया के सबसे जघन्य नरसंहारों में से एक माने जाने वाले जलियांवाला बाग हत्याकांड के 100 साल बाद आखिरकार ब्रिटिश सरकार ने इशारा किया है कि वह इसके लिए माफी मांग सकती है। भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई इस हत्याकांड के शताब्दी वर्ष के सिलसिले में मंगलवार शाम को हाउस ऑफ लॉर्ड्स (ब्रिटिश संसद) में हुई बहस के दौरान एक मंत्री ने सदन से कहा कि ब्रिटिश सरकार औपचारिक माफी की मांग पर विचार कर रही है।
गोल्डी ने ब्रिटिश विदेश सचिव जेरेमी हंट की तरफ से पिछले साल अक्तूबर में संसद की विदेश मामलों की समिति के सामने जलियांवाला बाग कांड को लेकर दिए गए मौखिक साक्ष्य का भी हवाला दिया। हंट ने समिति को मौखिक तौर पर इस घटना का ब्योरा देते हुए शताब्दी वर्ष को औपचारिक माफी मांगने के लिए सही समय बताया था। गोल्डी ने कहा कि सदन में हुई इस चर्चा में सामने आए विचार निश्चित तौर पर विदेश विभाग तक पहुंचाए जाएंगे।
जलियांवाला बाग हत्याकांड को लेकर लॉर्ड्स में चर्चा का दौर भारतीय मूल के सांसदों राज लूंबा और मेघनाद देसाई ने शुरू की थी। इन दोनों ने कहा था कि अप्रैल, 2019 में इस नरसंहार की शताब्दी अपनी गलतियों को सुधारने और औपचारिक माफी मांगने का सही समय है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरीजा मे को माफी मांगने के लिए पत्र लिखने वाले लूंबा और देसाई जलियांवाला बाग शताब्दी सालगिरह समिति के सदस्य हैं।
अमृतसर के जलियांवाला बाग में 13 अप्रैल, 1919 को महात्मा गांधी की तरफ से देश में चल रहे असहयोग आंदोलन के समर्थन में हजारों लोग एकत्र हुए थे। जनरल डायर ने इस बाग के मुख्य द्वार को अपने सैनिकों और हथियारंबद वाहनों से रोककर निहत्थी भीड़ पर बिना किसी चेतावनी के 10 मिनट तक गोलियों की बरसात कराई थीं। इस घटना में तकरीबन 1000 लोगों की मौत हो गई थीं, जबकि 1500 से ज्यादा घायल हुए थे।