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संक्रमित रक्त कांड: ब्रिटेन में 3000 मौतों पर आज राज खोलेगी अहम जांच रिपोर्ट, छह साल बाद होगा प्रकाशन

सार

ब्रिटेन में 1970-80 में हुई सैकड़ों लोगों की मौत से पर्दा उठेगा। संक्रमित रक्त कांड की आखिरी जांच रिपोर्ट छह साल बाद आज यानी सोमवार को प्रकाशित होगी। माना जाता है कि लगभग 3,000 लोग एचआईवी वायरस और हेपेटाइटिस, यकृत की सूजन से संक्रमित होने की वजह से मारे गए।  
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प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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ब्रिटेन के संक्रमित रक्त कांड की आखिरी जांच रिपोर्ट सोमवार को प्रकाशित होगी। आखिरकार जांच शुरू होने के लगभग छह साल बाद यह पता चल पाएगा कि 1970-80 में हजारों लोगों को दूषित रक्त चढ़ाने और रक्त उत्पादों से एचआईवी या हेपेटाइटिस कैसे हुआ। यह ब्रिटेन की 1948 में स्थापित सरकारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) को परेशानी में डाल देने वाले सबसे खतरनाक कांड के तौर पर जाना जाता है। माना जाता है कि लगभग 3,000 लोग एचआईवी वायरस और हेपेटाइटिस, यकृत की सूजन से संक्रमित होने की वजह से मारे गए।  

इस जांच रिपोर्ट के पीछे अभियान चलाने वालों का बड़ा योगदान है। इनमें से कई ने दशकों पहले अपने लोगों की वक्त से पहले मौत देखी। अगर यह न होते तो शायद ये घोटाला उजागर ही न हो पाता। इनमें से एक एड्स बॉय के नाम से मशहूर जेसन इवांस है।  

31 साल में हो गई थी इवांस के पिता की मौत : साल 1993 में एक संक्रमित रक्त प्लाज्मा उत्पाद से एचआईवी और हेपेटाइटिस के संक्रमण से 31 साल में ही इवांस के पिता की मौत गई थी। इवांस ने 2017 में तत्कालीन प्रधानमंत्री थेरेसा मे के इस कांड में जांच बैठाने का फैसला लेने में अहम भूमिका निभाई थी। 

क्या था संक्रमित रक्त कांड

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1970 और 1980 के दशक में हजारों लोग जिन्हें नस के जरिए रक्त चढ़ाने की जरूरत थी, उन्हें हेपेटाइटिस से दूषित रक्त चढ़ाया गया था। इसमें हेपेटाइटिस सी और एचआईवी वायरस से दूषित रक्त भी था। रक्त के थक्के बनने की क्षमता को प्रभावित करने वाली बीमारी हीमोफीलिया से पीड़ित लोगों को उस वक्त रक्त प्लाज्मा से निकाले गए एक क्रांतिकारी इलाज फैक्टर-8 दिया गया। एनएचएस ने 1970 के दशक की शुरुआत में इस नए इलाज का इस्तेमाल शुरू कर दिया। जल्द ही इसकी मांग आपूर्ति के घरेलू स्रोतों से आगे निकल गई, इसलिए स्वास्थ्य अधिकारियों ने अमेरिका से फैक्टर -8 का आयात करना शुरू कर दिया। 

पीड़ितों को मिल सकता है 10 बिलियन पाउंड का मुआवजा 
खास बात यह है कि फैक्टर-8 के लिए प्लाज्मा दान का एक बड़ा हिस्सा कैदियों और नशीली दवाओं का इस्तेमाल करने वालों से था। इन्हें रक्तदान के लिए पैसा दिया गया था। यूके में पीड़ितों और उनके परिवारों ने चिकित्सा लापरवाही के लिए 1980 के दशक में मुआवजे की मांग की थी। सरकार ने 1990 के दशक की शुरुआत में एचआईवी से संक्रमित लोगों को एकमुश्त भुगतान करने के लिए एक चैरिटी की स्थापना की, लेकिन इसने जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की। उलटा पीड़ितों पर दबाव डाला कि वे धन पाने के लिए स्वास्थ्य विभाग पर मुकदमा न करें। हालांकि अब सरकार ने मुआवजा देना मंजूर किया। अधिकांश अनुमानों के मुताबिक, अंतिम बिल 10 बिलियन पाउंड के आसपास है। 

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