ब्रिटेन में चार जुलाई को आम चुनाव-2024 के लिए मतदान कराए गए। मतदान के दिन राजनीतिक बहसों का शोर थमा रहा। ऐतिहासिक आम चुनाव के बाद देशभर में लगभग 40 हजार मतदान केंद्रों पर मतपत्रों की गणना होगी। लगभग 4.6 करोड़ (46 मिलियन) मतदाता वोट डालेंगे। भारतीय समयानुसार नतीजे शुक्रवार शाम तक आने का अनुमान है। जानिए मतदान से जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य
ब्रिटेन के संचार कार्यालय (ऑफकॉम) ने मीडिया निगरानी नियम बनाए हैं। इनके मुताबिक सभी सियासी और सरकार की नीतियों से जुड़े मुद्दों पर बहस ब्रिटेन के स्थानीय समयानुसार मतदान के दिन सुबह सात बजे से पहले समाप्त हो जानी चाहिए। वोटिंग शुरू होने के बाद रात 10 बजे तक किसी भी राजनीतिक चर्चा या विश्लेषण की अनुमति नहीं होती। मतदान के बाद इन्हीं नियमों के मुताबिक एग्जिट पोल के नतीजे दुनियाभर में प्रसारित किए जाते हैं। ऑफकॉम के दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि धारा 6 के तहत मतदान शुरू होने पर चुनाव और जनमत संग्रह के मुद्दों पर चर्चा और विश्लेषण समाप्त हो जाना चाहिए।
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आम जनता के लिए निष्पक्ष मतदान का माहौल बनाने का प्रयास
नियमों के मुताबिक ब्रिटेन का कोई भी प्रसारक मतदान के दिन किसी भी ओपिनियन पोल के नतीजे प्रकाशित या प्रसारित नहीं कर सकते। यह रोक उस समय तक प्रभावी रहती है, जब तक मतदान समाप्त न हो जाए। इन नियमों का मकसद चुनाव के दिन आम जनता के लिए निष्पक्ष मतदान का माहौल बनाना है। किसी भी तरह के हस्तक्षेप या चुनावी धांधली को रोकने के लिए कई और उपाय भी किए जाते हैं। यह भी रोचक है कि कई लोग डाक मतपत्र के माध्यम से पहले ही अपना वोट डाल चुके हैं।
19वीं सदी से चली आ रही परंपरा, गुरुवार को ही होता है मतदान
स्थानीय समय के अनुसार ब्रिटेन में आधी रात के करीब पहले परिणाम सामने आ जाते हैं। 19वीं शताब्दी से चली आ रही परंपरा का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि ब्रिटेन में सदियों से गुरुवार को ही मतदान कराए जा रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि शुक्रवार को श्रमिकों के लिए वेतन का दिन होता है। ऐसे में वीकएंड पर वोटिंग प्रतिशत घटने की आशंका होती है।
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किंग चार्ल्स तृतीय सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे
अनुमान के मुताबिक शुक्रवार को सुबह 10 बजे तक (ब्रिटिश टाइम) आधिकारिक चुनाव परिणाम आ जाएंगे। भारतीय समय के मुताबिक नतीजे शुक्रवार शाम चार-पांच बजे तक आ जाएंगे। मतदान के अगले दिन की गतिविधि भी बेहद रोचक होती है, क्योंकि हारने वाला पार्टी का नेता शाही परिवार के पास बकिंघम पैलेस जाकर आधिकारिक तौर पर हार स्वीकार करता है। इसके बाद जीतने वाले प्रत्याशी को ब्रिटेन के महाराज औपचारिक रूप से सरकार बनाने को आमंत्रित करते हैं। कई दशकों के बाद इस साल किंग चार्ल्स तृतीय यह औपचारिकता पूरी करेंगे।