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Bangladesh: 'देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना हमारा लक्ष्य', बोले अंतरिम वित्त सलाहकार सालेहुद्दीन अहमद

Sun, 11 Aug 2024 03:13 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ढाका

सार

सालेहुद्दीन अहमद ने कहा कि उन्हें देश के महत्वपूर्ण समय पर अहम जिम्मेदारी दी गई है। इस समय, यह केवल कानून व्यवस्था या सुरक्षा उपायों के बारे में नहीं है, बैंक खोलना, बंदरगाहों को चालू रखना, इन सब में समान महत्व देने की जरूरत है।
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सालेहुद्दीन अहमद - फोटो : https://www.bracu.ac.bd
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विस्तार
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बांग्लादेश में सियासी उथल-पुथल के बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हो गया। इस सरकार का मुख्य काम देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर वापस लाना है। वित्त और योजना सलाहकार सालेहुद्दीन अहमद ने कहा कि अंतरिम सरकार की प्राथमिकता केंद्रीय बैंक का कामकाज फिर से शुरू करते हुए बैंकों में आम लोगों का विश्वास बहाल करना है। बता दें कि अहमद बांग्लादेश के पूर्व बैंक गवर्नर थे, उन्हें मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में वित्त और योजना सलाहकार बनाया गया है। 
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पदभाग संभालने के बाद सालेहुद्दीन अहमद ने पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा, "हम सुधार लाने पर काम करेंगे। कई कारणों से देश की अर्धव्यवस्था धीमी पड़ गई है। हमारा लक्ष्य जल्द से जल्द देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना है। एक बार जब अर्थव्यवस्था रुक जाती है तब इसे दोबारा शुरू करना मुश्किल होता है। हम नहीं चाहते हैं कि इसमें रुकावट आए। अर्थव्यवस्था में कई तरह की समस्याएं हैं। बैंकिंग क्षेत्र, मुद्रास्फीति और कई अन्य मुद्दे हैं। हमें सभी मुद्दों पर काम करना होगा।"


अहमद ने कहा, "उन्हें देश के महत्वपूर्ण समय पर अहम जिम्मेदारी दी गई है। इस समय, यह केवल कानून व्यवस्था या सुरक्षा उपायों के बारे में नहीं है, बैंक खोलना, बंदरगाहों को चालू रखना, इन सब में समान महत्व देने की जरूरत है।" उन्होंने आगे कहा कि अंतरिम सरकार समान और न्याय-आधारित समाज बनाने के साथ महंगाई को कम कर आय में वृद्धि सुनिश्चित करना चाहती है।
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बता दें कि शुक्रवार को बांग्लादेश बैंक के गवर्नर अब्दुर रउफ तालुकदार ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दे दिया। शेख हसीना की सरकार के पतन के पांच दिन बाद ही मुख्य न्यायाधीश ओबैदुल हसन ने भी अपना इस्तीफा दे दिया। 

बांग्लादेश में क्यों भड़की हिंसा?
बांग्लादेश में 1971 में देश की आजादी के लिए लड़ने वाले स्वतंत्रतता सेनानियों के लिए तय किए आरक्षण के खिलाफ जुलाई में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे। धीरे-धीरे ये विरोध प्रदर्शन पूरे देश में फैल गए और छात्रों द्वारा प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग की जाने लगी। ये विरोध प्रदर्शन इतने हिंसक हो गए कि पांच अगस्त को बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपने पद से इस्तीफा देकर देश छोड़ना पड़ा। वहीं बांग्लादेश में नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हो चुका है। इस अंतरिम सरकार की देखरेख में ही अगले कुछ महीनों में चुनाव कराए जाने की बात कही गई है।
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