जानकारों ने ध्यान दिलाया है कि दुनियाभर की विकसित अर्थव्यवस्थाओं में लिथियम, कोबाल्ट, और रेयर अर्थ जैसे खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने बीते मई में कहा था कि लिथियम, तांबा, निकेल, कोबाल्ट, और रेयर अर्थ की सप्लाई दुनिया में बढ़ाने की जरूरत है, वरना दुनिया जलवायु परिवर्तन रोकने के लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाएगी। चीन, अफ्रीकी देश कोंगो, और ऑस्ट्रेलिया के पास लिथियम, कोबाल्ट, और रेयर अर्थ के सबसे बड़े भंडार हैं। अब दुनिया में ज्ञात कुल भंडार का 75 फीसदी हिस्सा इन तीन देशों के पास है। जहां तक अकेले लिथियम की बात है, तो उसका सबसे बड़ा भंडार लैटिन अमेरिकी देश बोलिविया में है।
अमेरिका सरकार का अनुमान है कि अफगानिस्तान में लिथियम का जितना भंडार है, मुमकिन है कि वह बोलिविया के बराबर हो। अमेरिका के भूगर्भीय सर्वे विभाग के एक अधिकारी ने 2010 में कहा था कि अगर अफगानिस्तान में कुछ वर्षों तक शांति रहे, तो खनिज भंडारों का दोहन संभव हो सकता है। लेकिन ऐसी शांति वहां कभी कायम नहीं हो सकी। इसके बावजूद सोना, तांबा और आयरन की कुछ खुदाई अफगानिस्तान में होती है। लिथियम और रेयर अर्थ के भंडारों की तलाश का कुछ काम भी आगे बढ़ा है।
अमेरिकी जानकारों को अंदेशा है कि अब अफगानिस्तान में जो हालात बने हैं, उसका फायदा चीन को मिल सकता है। तालिबान और चीन के बीच संपर्क बना हुआ है। तालिबान ने चीनी निवेश में दिलचस्पी भी दिखाई है। ऐसे में संभव है कि चीनी कंपनियों को वह खदानों को विकसित करने का काम सौंप दे। इस संभावना ने अमेरिका की चिंता और बढ़ा दी है।