पर्यवेक्षकों का कहना है कि म्यांमार में जब कोरोना संक्रमण की स्थिति बेकाबू होने लगी, तब चीन ने हस्तक्षेप किया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक बीती पांच अगस्त तक म्यांमार में कोरोना संक्रमण के तीन लाख 20 हजार मामले सामने आ चुके थे, जबकि 11 हजार लोगों की मौत हुई थी। 11 अगस्त तक औसतन रोजाना होने वाली मौतों की संख्या 300 से ऊपर हो गई। म्यांमार की आबादी पांच करोड़ 40 लाख है।
चीन ने म्यांमार को भी वैक्सीन मुहैया कराए हैं। उसने म्यांमार को 30 लाख डोज देने का वादा किया है। इनमें से साइनोफार्म वैक्सीन के 20 लाख डोज चीन ने अनुदान के रूप में दिया, जबकि साइनोवैक के दस लाख डोज म्यांमार सरकार ने खरीदे हैं।
जानकारों का कहना है कि जहां तक उग्रवादी गुटों की मदद का सवाल है, तो चीन ने यह कदम अपने बचाव में उठाया है। उसे आशंका है कि म्यांमार के इलाकों से संक्रमण उसके यूनान प्रांत में फैल सकता है। म्यांमार से संक्रमण के कुछ मामलों के यूनान में प्रवेश के बाद यूनान के गवर्नर जोंग गुओयिंग ने म्यांमार से लगी सीमा को सख्ती से बंद करने का फैसला किया था।
जानकारों का कहना है कि हालांकि वैक्सीन की सप्लाई मानवीय मदद की श्रेणी में आती है, लेकिन अलगाववादी बागी गुटों से चीन की एजेंसियों के सीधे संपर्क करने की खबर से म्यांमार की जनभावनाएं आहत हो सकती हैं। वहां के सैनिक शासक भी इसे नापसंद करेंगे, हालांकि उनकी चीन पर निर्भरता हाल में काफी बढ़ गई है।