ऑकुस समझौते पर नाराजगी भरी प्रतिक्रिया जताते हुए चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने गुरुवार को कहा कि चीन-ऑस्ट्रेलिया संबंधों आई गिरावट के लिए पूरी तरह से ऑस्ट्रेलिया जिम्मेदार है। ऑस्ट्रेलियन की नेशनल यूनिवर्सिटी में शोधकर्ता युन जियांग ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘ऑस्ट्रेलिया-चीन संबंधों के ताबूत में अब आखिरी कील ठोक दी गई है। अब कम से कम निकट भविष्य में दोनों देशों के बीच मेलमिलाप की कोई संभावना नहीं है।’
कुछ अन्य विश्लेषकों ने भी राय जताई है कि ऑकुस करार के साथ अब बात वहां पहुंच गई है, जहां से वापस लौटना संभव नहीं है। ऑस्ट्रेलिया की नेशनल यूनिवर्सिटी के नेशनल सिक्युरिटी कॉलेज के प्रमुख रोरी मेडकाफ ने कहा है- ‘इस समझौते के साथ ऑस्ट्रेलिया ने संकेत दिया है कि वह चीन के साथ रिश्तों के मामले में अब पीछे मुड़ कर नहीं देखना चाहता। अधिक से अधिक वह प्रतिस्पर्धा भरे सह-अस्तित्व की उम्मीद अब कर रहा है।’
लेकिन कुछ विशेषज्ञों की राय है कि ऐसी राह तय करने वाला ऑस्ट्रेलिया अकेला देश नहीं है। ऑस्ट्रेलियाई थिंक टैंक लोवी इंस्टीट्यूट के फेलॉ रिचर्ड मैकग्रेगॉर ने कहा है कि भारत और जापान भी क्वैड (चौगुट) में शामिल हो कर बाइडन प्रशासन के साथ मिल कर चीन के उदय को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं।