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तीन दिन की वर्चुअल शिखर बैठक: आसियान देशों ने खुल कर जताई ऑकुस पर अपनी चिंता, शक्ति संतुलन में बदलाव की आशंका

Thu, 28 Oct 2021 04:36 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर

सार

आसियान की शिखर बैठक के बीच में हुए ईस्ट एशिया सम्मेलन में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, भारत, चीन, जापान, न्यूजीलैंड, रूस, और दक्षिण कोरिया के प्रतिनिधि भी आमंत्रित किए गए थे। ऑकुस समझौता होने के बाद इस तरह की ये पहली बैठक थी...
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आसियान शिखर बैठक - फोटो : asean
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विस्तार
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दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों (आसियान) की शिखर बैठक में ऑकुस (ऑस्ट्रेलिया- यूनाइटेड किंगडम- यूनाइटेड स्टेट्स) रक्षा समझौते का मुद्दा प्रमुख बना रहा। आसियान के सदस्य दस देशों की तीन दिन की वर्चुअल शिखर बैठक मंगलवार को शुरू हुई। इसके बीच ही बुधवार को आसियान ने ईस्ट एशिया सम्मेलन का आयोजन किया। खबरों के मुताबिक इस संगठन के कई सदस्य देशों ने इन बैठकों को अपनी चिंता जताने का मौका बनाया।

आसियान क्षेत्र के शक्ति संतुलन में भारी बदलाव

आसियान की शिखर बैठक के बीच में हुए ईस्ट एशिया सम्मेलन में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, भारत, चीन, जापान, न्यूजीलैंड, रूस, और दक्षिण कोरिया के प्रतिनिधि भी आमंत्रित किए गए थे। ऑकुस समझौता होने के बाद इस तरह की ये पहली बैठक थी। ऑकुस के तहत एलान हुआ था कि अमेरिका और ब्रिटेन ऑस्ट्रेलिया को परमाणु क्षमता से लैस पनडुब्बी बनाने में मदद देंगे। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस करार से आसियान क्षेत्र के शक्ति संतुलन में भारी बदलाव आ गया है। इससे इस क्षेत्र के कई देश चिंतित हैं।  

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मलेशिया और इंडोनेशिया ने तो खुल कर अपनी चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि इस करार से इस क्षेत्र में हथियारों की होड़ शुरू हो जाएगी। वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक आसियान के कई सदस्य देशों में ये समझ है कि ऑकुस के कारण अमेरिकी खेमे और चीन के बीच नौसैनिक होड़ छिड़ जाएगी। इससे आसियान की प्रासंगिकता पर सवाल उठ खड़े होंगे।

लेकिन आसियान शिखर सम्मेलन में मलेशिया ने जो कहा, उससे संकेत मिला कि ऑकुस के मुद्दे पर आसियान के भीतर आमराय नहीं है। मलेशिया के प्रधानमंत्री साबरी याकूब ने कहा- मलेशिया इसे एक अफसोसनाक हालत मानता है कि ऑकुस और दक्षिण-पूर्व एशिया परमाणु मुक्त क्षेत्र संधि के मसलों पर इस संगठन के भीतर एकता की कमी है। सम्मेलन से पहले आसियान के औपचारिक बयान में ऑकुस का जिक्र नहीं हुआ। इसमें सिर्फ यह कहा गया कि आसियान से बाहर के पार्टनर देशों के साथ संबंध में इस समूह को एकता बनाए रखनी चाहिए।

परमाणु पनडुब्बी बनाने को लेकर चिंता

बुधवार को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन की मौजूदगी में कहा कि उनका देश ऑकुस को लेकर चिंतित है। उसे खास चिंता ऑस्ट्रेलिया के परमाणु पनडुब्बी बनाने को लेकर है, जिससे इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा तेज हो सकती है।

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थाईलैंड के प्रधानमंत्री प्रत्युत चनोचा ने आसियान शिखर सम्मेलन में कहा कि आसियान को एकजुट हो कर यह कहना चाहिए कि इस क्षेत्र में आसियान की केंद्रीय भूमिका है। इसे बनाए रखा जाना चाहिए। उन्होंने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आसियान के नेतृत्व में आसियान के दृष्टिकोण के मुताबिक पहल पर जोर दिया। सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सियेन लूंग ने भी आसियान केंद्रित क्षेत्रीय ढांचे की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया।

ऑकुस को इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा समर्थन फिलीपीन्स के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते से मिला है। लेकिन आसियान की बैठक में दुतेर्ते ने कहा कि ऑकुस जैसे समझौतों को इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने में योगदान करना चाहिए। उन्हें ऐसी दिशा में नहीं जाना चाहिए, जिनसे इस क्षेत्र में पेचीदगियां पैदा हों।

खबरों के मुताबिक ईस्ट एशिया सम्मेलन में अपने संबोधन में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के नेताओं का पूरा जोर यह आश्वासन देने पर रहा कि ऑकुस समझौते से आसियान के प्रति उनकी वचनबद्धता पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडंन ने कहा कि अमेरिका आसियान की केंद्रीय भूमिका के प्रति वचनबद्ध है और वह आसियान की इंडो-पैसिफिक दृष्टि का पूरा समर्थन करता है।

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