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तालिबान के कब्जे में अफगानिस्तान: अमेरिकी फौज की वापसी के बाद आखिर कितने दिनों टिक पाएगी गनी सरकार?

Sat, 26 Jun 2021 04:18 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल

सार

तालिबान को मिल रही इस कामयाबी को देखते हुए अब ये आशंका गहरा गई है कि अगले 11 सितंबर तक सभी अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद मौजूदा अफगान सरकार ज्यादा दिन तक नहीं टिक पाएगी...
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तालिबान - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज की वापसी शुरू होने के साथ ही देश के अलग-अलग हिस्से तेजी से तालिबान के कब्जे में आते जा रहे हैं। तालिबान का कब्जा बढ़ने की रफ्तार इतनी तेज है कि इसका अंदाजा खुद उसके नेताओं को भी नहीं था। अमेरिकी टीवी चैनल एनबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश का लगभग एक तिहाई भू-भाग अब तक तालिबान के कब्जे में आ चुका है। 42 फीसदी और हिस्सों को अपने कब्जे में लेने के लिए तालिबान लड़ाके युद्ध में जुटे हैं।

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गजनी राज्य में तालिबान के एक कमांडर ने एनबीसी से कहा कि जिस रफ्तार से तालिबान आगे बढ़ा है, उससे उन्हें हैरत हुई है। कमांडर ने कहा कि कुछ इलाकों पर तो तालिबान ने जानबूझ कर कब्जा नहीं किया है, ताकि अमेरिकी फौज उससे नाराज ना हो। अफगान मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक ग्रामीण इलाकों और यहां तक कि राजधानी काबुल के पास के इलाकों में भी तालिबान के लड़ाके तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अब उनका अफगानिस्तान के जितने हिस्से पर कब्जा है, वह दो महीने तक के उनके कब्जे वाले क्षेत्र की तुलना में दो गुना ज्यादा है।

तालिबान को मिल रही इस कामयाबी को देखते हुए अब ये आशंका गहरा गई है कि अगले 11 सितंबर तक सभी अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद मौजूदा अफगान सरकार ज्यादा दिन तक नहीं टिक पाएगी। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी और दूसरे नेता शुक्रवार को वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से मिले। बाइडेन ने उन्हें भरोसा दिया कि अमेरिकी फौज की वापसी के बाद अमेरिका अफगानिस्तान को राजनीतिक और आर्थिक मदद देना जारी रखेगा। लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि जिन नेताओं को बाइडेन ने ये भरोसा दिया, अब उनका भविष्य ही अधर में लटका दिखता है।
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फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज लॉन्ग वॉर नाम की पत्रिका के संपादक बिल रोजियो ने एनबीसी को बताया कि अभी अफगानिस्तान के 142 जिलों पर तालिबान का नियंत्रण है। 170 और जिले अपने प्रभाव क्षेत्र में लाने के लिए तालिबान लड़ाई लड़ रहा है। रोजियो ने कहा- ‘तालिबान ने देश के उत्तरी भाग में अपने हमलों के जरिए अफगान सरकार पर भारी दबाव बना रखा है। उत्तर के दूर दूर तक फैले इलाके में तालिबान ने अफगान फौज के संसाधन खींच लिए हैं। इससे फौज को काबुल सहित बाकी देश में बागियों से निपटने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।’

उत्तरी अफगानिस्तान में मई के बाद से तालिबान ने 40 से ज्यादा नए जिलों पर कब्जा जमा लिया है। इस हफ्ते सोमवार को कुंडुज प्रांत के एक प्रमुख जिले पर उसका नियंत्रण कायम हो गया। खबरों के मुताबिक कुछ जगहों पर तालिबान का हमला होने पर सरकारी सुरक्षा बलों की इकाइयां बिना ज्यादा लड़े अपने हथियार छोड़ कर भाग गईं। कुछ जगहों पर स्थानीय अधिकारियों ने तालिबान के सामने समर्पण के लिए उनसे समझौता कर लिया।

तालिबान के प्रवक्ता जबिनुल्लाह मुजाहिद ने एनबीसी से कहा कि कई मामलों में पूरे प्रांत या प्रांतीय राजधानियों पर तालिबान ने जानबूझ कर कब्जा नहीं किया है। इसकी वजह यह है कि दोहा में 2020 में अमेरिका के साथ उसका जो समझौता हुआ था, वह उसका उल्लंघन नहीं करना चाहता। मुजाहिद ने कहा- ‘हम दोहा समझौते का पालन करने के लिए बाध्य हैं। हम सितंबर 2021 तक अफगानिस्तान में किसी पूरे प्रांत या प्रांतीय राजधानी पर कब्जा नहीं करना चाहते, जब तक अमेरिकी फौजें हमारे देश से वापस ना चली जाएं।’

जानकारों के मुताबिक दोहा समझौते में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसमें किसी प्रांत या उसके शहरों पर कब्जा जमाने से रोकने की बात हो। उसमें यह प्रावधान जरूर है कि तालिबान अमेरिकी फौज पर हमले नहीं करेगा। इसलिए पर्यवेक्षको के मुताबिक प्रांत या प्रांतीय राजधानी पर तालिबान इसलिए कब्जा नहीं कर रहा है, ताकि अमेरिका और नाटो देश फौज वापसी से पहले ही उससे नाराज ना हो जाएं।

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