रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव
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रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही रूस यात्रा की प्रंशसा की। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने एजेंडे में जी20, ब्रिक्स और यूएन जैस वैश्विक संगठनों में सहयोग जैसे मुद्दों पर बातचीत की। उन्होंने पीएम मोदी की इस यात्रा को सफल बताया। रूस के उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने दोनों नेताओं, पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच घनिष्ठ संबंधों का हवाला देते हुए दोनों देशों के मजबूत संबंधों की प्रशंसा की।
रूस में आयोजित 22वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे थे। 8-9 जुलाई को आयोजित इस सम्मेलन में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय एजेंडे के मुद्दों पर चर्चा की गई। पीएम मोदी की यात्रा के बाद रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाने के लिए रूस समर्थन करेगा। वहीं उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन के दौरान दोनों देश के नेताओं के बीच कई मुद्दों पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह यात्रा सफल रही। उन्होंने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्थिति, जी20, ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन और संयुक्त राष्ट्र में हमारे सहयोग पर चर्चा की गई।
उन्होंने पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के 20 साल के पुराने संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ये संबंध दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करेगी। उन्होंने कहा, ‘दोनों देशों के बीच आपसी समझ है, द्विपक्षीय एजेंडे पर कार्यों की समझ है, और अंतरराष्ट्रीय नीतियों से संबंधित मुद्दों पर भी बिल्कुल सी समझ है। मुझे यकीन है कि यह यात्रा सभी क्षेत्रों में संबंधों को बहुत सकारात्मक बढ़ावा देगी।’
वहीं रूस के उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने दोनों नेताओं, पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच घनिष्ठ संबंधों का हवाला देते हुए दोनों देशों के मजबूत संबंधों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि संबंधों का स्तर, विशेष रूप से दोनों नेताओं के बीच देखा जा सकता है। अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्र शिक्षा सहित सहयोग से लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि रूस में 20,000 से अधिक भारतीय छात्र अध्ययन कर रहे हैं, जिनमें से अधिकांश चिकित्सा विश्वविद्यालयों में हैं। उन्होंने समझाया कि यह साझेदारी केवल व्यापार ही नहीं बल्कि सभी क्षेत्रों में बढ़ रही है। अगर हम अर्थव्यवस्था के क्षेत्र की बात करें, तो ऐसे क्षेत्रों की एक लंबी सूची है, जहां हम सहयोग के परिणाम देश सकते हैं।