चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग और मालदीव के नए राष्ट्रपति मुइज्जू (फाइल)
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बीते कुछ दिन पहले मालदीव के मंत्रियों द्वारा पीएम मोदी के लक्षद्वीप से जुड़े पोस्ट पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थी। जिसके बाद से भारत और मालदीव के बीच तल्खियां बढ़ गई हैं। इसी बीच, मालदीव सरकार के एक चौंकाने वाले फैसले ने चीन के विरोधियों की नींद उड़ा दी है। मुइज्जू सरकार ने चीन के अनुसंधान और सर्वेक्षण पोत को मालदीव के बंदरगाह पर खड़े होने की अनुमति दी है। इस फैसले ने अमेरिका, जापान, भारत, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को हैरत में डाल दिया है। गौरतलब है कि हिंद महासागर में लगातार चीन अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। चीन की विस्तारवादी नीति को रोकने के लिए दुनिया के कई देश लामबंद हो गए हैं।
'हम मित्र देशों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं'
मंगलवार को मालदीव के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि चीन सरकार द्वारा पोर्ट कॉल करने, कर्मियों के रोटेशन के लिए आवश्यक मंजूरी के लिए एक राजनयिक अनुरोध किया गया था। हालांकि बयान में कहा गया कि चीनी अनुसंधान पोत जियांग यांग होंग-3 मालदीव के जल क्षेत्र में किसी भी प्रकार का शोध नहीं करेगा। मालदीव के विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम अपने मित्र देशों के जहाजों की मदद करते हैं। शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बंदरगाह पर जाने वाले नागरिक, सैन्य जहाजों को अनुमति देता है।
मोहम्मद मुइज्जू के आते ही बढ़ा मालदीव-भारत विवाद
हाल ही में मालदीव में आम चुनाव हुए। नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के सत्ता में आने के बाद से ही भारत के साथ लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। उनके राष्ट्रपति पद संभालने के बाद बीजिंग को उन्होंने अपना पहला बंदरगाह बनाया है। खास बात है कि परंपरागत रूप से नई दिल्ली मालदीव के राष्ट्रपति के लिए कॉल का पहला बंदरगाह रहा है।
अमेरिका का आरोप, चीन कर रहा महासागरों की जासूसी
जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाली निजी वेबसाइट मरीन ट्रैफिक ने मुताबिक आठ फरवरी को चीनी पोत के पहुंचने की संभावना है। अमेरिकी थिंक टैंक के मुताबिक चीन महासागरों से जुड़ी जानकारियों को इकट्ठा करने के लिए एक अनुसंधान पोत को दुनियाभर में भेज रहा है। हालांकि चीन ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया है।