ताजा मिसाइल परीक्षण के बाद यूरोप में उत्तर कोरिया के सांस्कृतिक संबंधों के विशेष प्रतिनिधि एलेग्जेंड्रो काओ डि बेनो ने कहा कि किसी भी हमले की सूरत में उनका देश अमेरिका पर हाइड्रोजन बम गिराने को तैयार है।
इतना ही नहीं उन्होंने यह भी चेतावनी दे डाली कि उत्तर कोरिया आज की तारीख में अमेरिका के किसी भी शहर को निशाना बनाने में सक्षम है।एलेग्जेंड्रो काओ डि बेनो किम जोंग के सबसे करीबी लोगों में से माने जाते हैं।
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परमाणु परीक्षण के बाद दो हफ्ते से भी कम समय में उत्तर कोरिया ने जापान की ओर एक और मिसाइल दागी है, जिसके बाद इस क्षेत्र में चल रहा तनाव और बढ़ गया है।
दुनिया को अपनी क्षमता दिखा दी
Alexandra Cao Di Beno
एलेग्जेंड्रो काओ डि बेनो ने बीबीसी रेडियो फ़ाइव से कहा, 'अमेरिका के सभी वैज्ञानिकों को यह पता चल गया होगा कि हमने जो मिसाइल चलाई है वो कम ऊंचाई के बावजूद लंबी दूरी तय कर सकती है। इसे हम चार हजार किलोमीटर तक भेज कर सकते हैं।
यानी अब हम अमरीका के लगभग किसी भी शहर तक पहुंच सकते हैं। उन्होंने कहा, 'इसके अलावा हमने कई परमाणु परीक्षण भी किए हैं। यह हमारी परमाणु क्षमताएं दिखाती हैं। दुनिया को अब हमारी तकनीकी और वैज्ञानिक क्षमताओं का पता चल गया है।
उत्तर कोरिया की सेना ने कहा, "मिसाइल ने 770 किलोमीटर की ऊंचाई हासिल की और होकाइडो के समंदर की ओर करीब 3,700 किलोमीटर की दूरी तय की।
काउ डि बेनो ने कहा, 'डोनल्ड ट्रंप यह जानते हैं कि खेल खत्म हो चुका है, लेकिन दुनिया के सामने टीवी पर अपनी मजबूती जताते हुए यह ढोंग करते हैं कि वो अमरीका को फिर से महान बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
दूसरी तरफ किसी भी गंभीर स्थिति से बचने और शुरुआती सहमति बनाने को लेकर हमारी पहले से बातचीत चल रही है।
अमेरिका अपने रुख पर कायम
UNO
उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमरीका लगातार चेतावनी दे रहा है। हालांकि उत्तर कोरिया पर इसका खास असर नहीं दिख रहा है। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निकी हेली ने कहा कि अगर कड़ी आर्थिक पाबंदियां कारगर नहीं होती हैं तो वॉशिंगटन के पास सैन्य कार्रवाई के और विकल्प भी मौजूद हैं।
सुरक्षा परिषद की आपात बैठक
गुरुवार को उत्तर कोरिया के जापान की ओर अपनी अब तक की सबसे लंबी दूरी की मिसाइल का परीक्षण करने के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आपात बैठक बुलाई और प्योंगयांग से इस तरह की कार्रवाई को तत्काल रोकने को कहा।
मिसाइल परीक्षण के तुरंत बाद तीखे बयानों के बाद, अमरीका, चीन और रूस इस मुद्दे पर साथ नजर आए। बयान में सदस्य देशों से प्रतिबंधों को कड़ाई से लागू करने को कहा गया है।
रूस चाहता है कूटनीतिक उपाय
North Korea and America
बैठक से पहले अमेरिका, चीन और रूस के बीच इस मुद्दे पर तब विवाद पैदा हो गया था जब अमेरिका ने इसकी सारी जिम्मेदारी रूस और चीन पर डाल दी थी।
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हालांकि इस मिसाइल परीक्षण के बाद संयुक्त राष्ट्र में रूसी राजदूत वैसिली नेबेंजिया ने कहा कि कूटनीति ही इस संकट का एकमात्र रास्ता है। उत्तर कोरिया के शुरुआती मिसाइल परीक्षणों के बाद सुरक्षा परिषद ने उस पर लगे प्रतिबंधों को और कड़ा करने का फैसला किया था।
लेकिन इस परीक्षण के बाद आए ताजा बयान में पाबंदियों को बढ़ाने का कोई जिक्र नहीं किया गया है।