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सीआईए पर कांग्रेस की जासूसी करने का आरोप

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अमेरिकी सीनेट की इंटेलिजेंस समिति की अध्यक्ष ने देश की ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए पर कांग्रेस की जासूसी करने का आरोप लगाया है। सीनेटर डाएन फ़ाइनस्टाइन ने कहा है कि सीआईए ने ग़लत तरीक़े से कांग्रेस के कर्मचारियों के कंप्यूटरों की छान-बीन की।
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यह समिति बुश प्रशासन के दौरान सीआईए द्वारा संदिग्धों को यातना देने के आरोपों की जांच कर रही थी। फ़ाइनस्टाइन के मुताबिक़ सीआईए ने उनकी जांच में बाधा पहुंचाई, अपनी गतिविधियों के बारे में झूठ बोला और समिति के कंप्यूटरों से फ़ाइलें हटाईं।

उन्होंने ये भी कहा कि संभव है कि इस तरह की गतिविधियों से सरकार के कामकाज पर नज़र रखने का संवैधानिक ढांचा प्रभावित हुआ हो। सीआईए की एक आंतरिक निगरानी संस्था को इस कथित हैकिंग की जांच करने का काम सौंपा गया है।
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'अनोखा मामला'

वॉशिंगटन में मौजूद बीबीसी संवाददाता रजनी वैद्यनाथन का कहना है कि यह झगड़ा अनोखा है क्योंकि यह बेहद सार्वजनिक है। किसी वरिष्ठ अमेरिकी सीनेटर, और ख़ासकर इंटेलिजेंस समिति के किसी सदस्य द्वारा सीनेट के अंदर इस तरह के आरोप लगाना काफ़ी असमान्य है।

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ फ़ाइनस्टाइन असल में सीआईए की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल उठा रही हैं। मंगलवार को इस मामले पर फ़ाइनस्टाइन ने कहा, "मैं इसे हल्के में नहीं ले रही। हो सकता है कि सीआईए ने अपनी इस कथित हरकत से संघीय क़ानूनों का उल्लंघन किया हो।"

लेकिन सीआईए के निदेशक जॉन ब्रैनन ने सीनेट के इन आरोपों को ख़ारिज किया है।

सीआईए का इंकार

मंगलवार को वॉशिंगटन में एक कार्यक्रम में ब्रैनन ने कहा, "यह बात बिलकुल भी सच नहीं है। इस मामले से सही तरीके से निपटा जा रहा है, इसकी जांच सही अधिकारी कर रहे हैं और सभी तथ्य सामने आएंगे।"

सीआईए पर यह भी आरोप है कि संस्था द्वारा कथित यातना की एक जांच के दौरान सीनेट इंटेलिजेंस समिति ने जिन कंप्यूटरों का इस्तेमाल किया था, उन कंप्यूटरों से सीआइए ने गुप्त रूप से 900 से ज़्यादा दस्तावेज़ हटा दिए।

ख़ुफ़िया एजेंसी ने कांग्रेस सदस्यों को ये कंप्यूटर उत्तरी वर्जीनिया में एक सुरक्षित जगह पर मुहैया कराए थे ताकि सीनेट के जांचकर्ता गोपनीय दस्तावेज़ों के लाखों पन्नों की समीक्षा कर सकें।
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'माफ़ी मांगे सीआईए'

मंगलवार को फ़ाइनस्टाइन ने कहा कि कांग्रेस के नेटवर्क में इस तरह ग़लत घुसपैठ का मामला अगर सच है तो यह जांचकर्ताओं को धमकाने की कोशिश जैसा है।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने सीआईए से माफ़ी मांगने और यह क़बूलने के लिए कहा है कि यह छानबीन ग़लत थी। फ़ाइनस्टाइन ने कहा कि ख़ुफ़िया संस्था को 17 और 23 जनवरी को ख़त लिखने के बावजूद सीआईए ने उनके कहने के मुताबिक़ कुछ नहीं किया।

उधर अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जे कार्नी ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इंकार किया है। लेकिन उन्होंने कहा कि न्याय विभाग को यह मामला जांच के लिए सौंप दिया गया है।
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