अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हांगकांग में लोकतंत्र की मांग के लिए चल रहे प्रदर्शनों का समर्थन करने संबंधी एक विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए हैं जिससे चीन बेहद खफा है और उसने अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने की धमकी दी है।
माना जा रहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप के इस कदम से चीन और अमरीका के रिश्तों में जारी खटास और ज्यादा बढ़ सकती है। चीन ने पहले भी हांगकांग के मामले में अमरीका को दखल अंदाजी ना करने की बात कही थी।
मंगलवार को चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि उन्होंने बीजिंग में मौजूद अमरीकी राजदूत को समन जारी किया है। इस समन में उनसे कहा गया था कि वो अमरीका को यह बता दें कि अगर वह बिल को मंजूरी दे देते हैं तो फिर उसके बाद होने वाले परिणामों के लिए भी तैयार रहे।
चीन ने अमेरिकी राजदूत को तलब किया
वहीं चीन के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राजदूत को तलब किया और संबंधों में आगे किसी तरह के नुकसान से बचने के लिए उस विधेयक को लागू करने से रोकने की अमेरिका से अपील की जो हांगकांग में लोकतंत्र के पक्ष में हो रहे आंदोलन का समर्थन करता है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि चीनी विदेश उपमंत्री ली युचेंग ने राजदूत टेरी ब्रैनस्टेड के समक्ष कड़ा विरोध जाहिर किया और मांग की कि अमेरिका अपनी गलतियों को सुधारे और अपना रुख बदले।
ट्रंप ने क्यों किए बिल पर हस्ताक्षर?
डोनाल्ट ट्रंप इससे पहले हांगकांग से जुड़े इस बिल पर हस्ताक्षर करने के लिए उत्साहित नहीं थे। गौरतलब हो कि ट्रंप ने कहा था कि वो हांगकांग के साथ खड़े हैं लेकिन उसी वक्त उन्होंने यह भी कहा था कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक बेहतरीन शख्स है।
माना जा रहा है कि अमेरिकी संसद की तरफ से लगातार बढ़ते दबाव के चलते ट्रंप को इस पर हस्ताक्षर करना पड़ा है। कांग्रेस के कई सदस्यों द्वारा इस बिल का समर्थन किया जा रहा था। अगर ट्रंप इस बिल पर वीटो भी करते तो बाकी के सांसद उनके फैसले के खिलाफ वोट कर इसे पलटने का दम रखते थे।
इस बिल के अलावा ट्रंप ने एक और बिल पर भी हस्ताक्षर किए हैं। यह बिल हांग कांग पुलिस को मिलने वाले असला-बारूद को प्रतिबंधित करने से जुड़ा है। इस बिल के अनुसार भीड़ को नियंत्रित किए जाने के लिए प्रयोग में लिए जाने वाले आंसू गैस, रबर बुलेट या स्टन गन इनके निर्यात पर प्रतिबंध लगाया जाना है।
ट्रंप ने कहा है कि इन दोनों बिलों के जरिए हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि चीन और हांगकांग के प्रतिनिधि साथ में बैठकर हालात सुधारने पर विचार करें। उन्होंने कहा कि चीन और हांग कांग दोनों के प्रतिनिधियों को अपने मतभेद भुलाकर शांति और समृद्धि के लिए आगे बढ़ना चाहिए।