अमेरिका में अब युवा, दक्षिणी प्रांतों के लोग, ग्रामीण और श्वेत लोग कोविड-19 के ज्यादा शिकार बन रहे हैं। हाल में इस संक्रमण के कारण ऐसे लोगों की मौत ज्यादा संख्या में हुई है। अमेरिका में पिछले तीन महीनों के दौरान कोविड-19 की वजह से एक लाख से ज्यादा लोगों की जान गई। इस अवधि में सबसे ज्यादा तबाही कोविड-19 के डेल्टा वैरिएंट से हुई है।
टीवी चैनल एनबीसी के एक विश्लेषण के मुताबिक, बीते तीन महीनों में कोरोना संक्रमण कई ऐसी जगहों पर फैला, जहां इसकी पहली लहर नहीं पहुंची थी। एनबीसी के इस अध्ययन में यह देखने की कोशिश की गई कि अमेरिका में कोविड-19 के कारण पहली एक लाख मौतों और आखिरी एक लाख मौतों में क्या फर्क रहा?
इसके मुताबिक, पहले दौर में कोविड-19 के हॉटस्पॉट देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में मौजूद बड़े शहर थे। अब तक के आखिर दौर में ग्रामीण इलाकों में इसका ज्यादा कहर देखने को मिला है। पहले दौर में बुजुर्ग और पहले से रोगग्रस्त लोग इसके ज्यादा शिकार बने थे। अंतिम दौर में यह बात नहीं रह गई। अब देखने को मिला है कि जिन लोगों ने वैक्सीन लगवाई, वे इसके ज्यादा शिकार बन रहे हैं, भले वे किसी उम्र वर्ग के हों।
एनबीसी के अध्ययन का निष्कर्ष है कि पिछले तीन महीने में कोरोना संक्रमण का असर लगभग पूरे देश में एक जैसा रहा है। मौतें ज्यादातर दक्षिण राज्यों में हुई हैं। पहले दौर में कुछ राज्यों और शहरों में अधिक मौत हुई थीं, लेकिन इस दौर में कोई ऐसा राज्य नहीं है, जिसका कुल मौतों में हिस्सा पांच फीसदी से ज्यादा रहा हो। पहले दौर में 29 ऐसे राज्य थे, जिनका हिस्सा कुल मौतों में एक फीसदी से कम था। हालिया दौर में ऐसे राज्यों की संख्या सिर्फ 17 रही।
पिछले तीन महीने में जो एक लाख मौतें हुईं, उनमें सबसे ज्यादा हिस्सा 55-74 वर्ष उम्र वर्ग के लोगों का रहा। वहीं, पहली एक लाख मौतों में 75 फीसदी हिस्सा 75 साल से अधिक उम्र के लोगों का रहा था। वॉशिंगटन स्थित इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के अनुसंधानकर्ताओं ने कोरोना महामारी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए भविष्य के लिए अनुमान लगाए हैं। उनके मुताबिक, इस साल 31 दिसंबर अमेरिका में कोविड-19 संक्रमण से अभी 20 हजार मौतें और होंगी। अब तक देश में 7.68 लाख से ज्यादा लोग इस महामारी की वजह से मर चुके हैं।
अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि वैक्सीन की उपलब्धता के बावजूद इतने और लोगों की संभावित मृत्यु एक बड़ी संख्या है। एक अनुसंधानकर्ता ने एनबीसी से कहा- दो साल गुजर गए और अब हम जानते हैं कि क्या उपाय कारगर है। फिर भी लोगों का मरना व्यग्र करने वाला पहलू है। मुझे आशा है कि अभी अमेरिका जिस दौर से गुजरा है, वह कोरोना महामारी की आखिरी बड़ी लहर वाला दौर साबित होगा। लेकिन असल में क्या होगा, यह हमें मालूम नहीं है।’