तालिबान और पाकिस्तान के संबंध तोड़ने में अमेरिका नाकाम
अमेरिका के एक शीर्ष सांसद ने कहा कि उनका देश तालिबान के लिए पाकिस्तान का समर्थन रोकने में नाकाम रहा और यह अफगानिस्तान में ‘‘अमेरिका की विफलता’’ की मुख्य वजहों में से एक है। सीनेटर जैक रीड ने कहा, ‘‘अमेरिकी सेना की वापसी और उसके आसपास की घटनाएं बाहरी प्रभावों से अलग नहीं थीं। इराक में जो कुछ हमारे साथ हुआ, तालिबान के लिए पाकिस्तान के समर्थन से निपटने में हमारी नाकामी और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किए गए त्रुटिपूर्ण दोहा समझौते ने अफगानिस्तान में हमारी असफलता की राह बनाई।’’
अफगान सरकार का नेतृत्व कर रहे आतंकी
सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति के सदस्य सीनेटर जिम इनहोफ ने कहा कि अफगान सरकार का नेतृत्व अब आतंकवादी कर रहे हैं जिनका लंबे समय से अल-कायदा से संबंध रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘और हम अफगानिस्तान हवाई क्षेत्र में प्रवेश के लिए पाकिस्तान सरकार की दया पर निर्भर है। अगर हम वहां प्रवेश भी कर लें तो हम अफगानिस्तान में अल-कायदा पर हमला नहीं कर सकते क्योंकि हमें चिंता है कि तालिबान वहां मौजूद अमेरिकियों के साथ क्या करेगा।’’
सुनवाई के दौरान सीनेटर रीड ने कहा कि युद्ध के दौरान अमेरिका, तालिबान को पाकिस्तान से मिल रहे समर्थन से निपटने मे नाकाम रहा, यहां तक कि अमेरिकी राजनयिकों ने पाकिस्तानी नेताओं के साथ मुलाकात की और उसकी सेना ने आतंकवाद रोधी अभियान में सहयोग दिया।
अमेरिकी सीनेटरों द्वारा पेश किए गए मसौदा विधेयक के बारे में मीडिया के सवालों के जवाब में, इस्लामाबाद विदेश कार्यालय ने कहा कि मसौदा वॉशिंगटन में मीडिया और कैपिटल हिल दोनों में अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी को लेकर चल रही बहस को लेकर एक प्रतिक्रिया जैसा नजर आता है।
पाकिस्तान के संदर्भ में ये कानून पूरी तरह से अनुचित हैं। हम इसे 2001 से अफगानिस्तान पर पाकिस्तान-अमेरिका सहयोग की भावना विपरीत पाते हैं, जिसमें अफगान शांति प्रक्रिया की सुविधा और अफगानिस्तान से अमेरिकी और अन्य देशों के नागरिकों की हालिया निकासी शामिल हैं।