यूरोपीय टीवी चैनल यूरो न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक इन कदमों का असर यह हुआ है कि अफगानिस्तान में बैंकों ने रकम निकालने की सीमा तय कर दी है। उधर सरकारी कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें महीनों से तनख्वाह नहीं मिली है। गहराते संकट के बीच अधिक से अधिक अफगानी देश छोड़ कर जाने की फिराक में हैं।
इस रिपोर्ट के मुताबिक देश में मेडिकल उपकरणों की पहले से कमी है। उन्हें इस्तेमाल करने में सक्षम विशेषज्ञों की भी पिछले महीनों में कमी हो गई है। जानकारों के मुताबिक जब तालिबान देश पर कब्जा जमाते हुए आगे बढ़ रहा था, तभी से मेडिकल विशेषज्ञों के देश छोड़ कर जाने का सिलसिला लग गया। उधर लंबे समय से जारी सूखे के कारण अफगानिस्तान के कई इलाकों में खाद्य सामग्रियों की भारी कमी है। अब चूंकि बाहर से अनाज मंगवाना भी मुश्किल हो गया है, इसलिए जानकारों को अंदेशा है कि अफगानिस्तान में भुखमरी की स्थिति बन सकती है।
इस बीच तालिबान के सामने कूटनीतिक मोर्चे पर अपनी वैधता साबित करने की कठिन चुनौती भी है। तालिबान लगातार यह कह रहा है कि वह अमेरिका सहित तमाम देशों के साथ अच्छे संबंध रखना चाहता है। लेकिन अमेरिका और दूसरे विकसित देश यह कह चुके हैं कि वे तालिबान के बारे में अपनी राय उसके व्यवहार को देखते हुए बनाएंगे। अमेरिका और उसके साथ देशों ने कहा है कि अब आतंकवाद को रोकने, महिलाओँ सहित सबके मानवाधिकारों की रक्षा करने, अल्पसंख्यकों की रक्षा करने और सभी पक्षों को शामिल करते हुए अफगानिस्तान में समावेशी सरकार बनाने की जिम्मेदारी तालिबान पर है। इन मामलों में उसका क्या रुख रहता है, इसके आधार पर ही उसके बारे में फैसला लिया जाएगा।