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पाकिस्तान में अविश्वास प्रस्ताव: ‘माइनस इमरान खान’ फॉर्मूला सुझा रहे सहयोगी दल, क्या सुप्रीम कोर्ट बनेगा तारणहार?

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 19 Mar 2022 07:09 PM IST

सार

एमक्यूएम-पी के संयोजक खालिद मकबूल सिद्दिकी ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा- ‘मौजूदा घटनाओं को देखते हुए मेरी राय में इमरान खान के सत्ता में बने रहने की अब कोई संभावना नहीं बची है। लेकिन पीटीआई के पास अब अन्य विकल्प जरूर मौजूद हैं।’
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इमरान खान और कमर जावेद बाजवा - फोटो : Agency (File Photo)


उसी टीवी कार्यक्रम में पीएमएल-क्यू की तरफ से इमरान खान सरकार में आवास मंत्री तारिक बशीर चीमा ने सिद्दिकी की इस राय से सहमति जताई। उन्होंने कहा- ‘कोई नया दुस्साहस करने के बजाय प्रधानमंत्री को अपनी पार्टी के अंदर से ही एक ऐसा नेता चुन लेना चाहिए, जो सबको मंजूर हो।’ लेकिन फिलहाल पीटीआई ने ऐसा करने की संभावना से इनकार किया है। विदेश मंत्री शाह मोहम्मद कुरैशी ने शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि ऐसा किए जाने की कोई गुंजाइश नहीं है।


मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक दो दर्जन सांसदों की बगावत से पहले ही गुरुवार को इमरान खान ने पार्टी के एक बैठक में संकेत दे दिया था कि उनकी सरकार खतरे में है। उन्होंने पार्टी सदस्यों से कहा कि वे विपक्ष में बैठने के लिए तैयार हो जाएं। शुक्रवार को दो दर्जन सांसदों ने इस्लामाबाद स्थित सिंध हाउस में पनाह ले ली। सिंध में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार है। इसलिए सिंध हाउस की सुरक्षा वहां की पुलिस के हाथ में है। शुक्रवार को दोपहर बाद पीटीआई कार्यकर्ताओं की एक भीड़ तोड़फोड़ करते हुए सिंध हाउस में घुस गई। इससे पाकिस्तान में सियासी हिंसा का अंदेशा और गहरा गया है।

सुप्रीम कोर्ट में लगाई अर्जी

इस बीच सूचना मंत्री फव्वाद चौधरी ने एलान किया है कि सरकार ने पाकिस्तान के संविधान की धारा 63(ए) की व्याख्या के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दे दी है। चौधरी ने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट सोमवार से रोजाना के आधार पर इस याचिका पर सुनवाई करेगा। उन्होंने कहा- सुप्रीम कोर्ट से यह व्याख्या करने की गुजारिश की जाएगी कि अगर सांसद सियासी खरीद-फरोख्त में शामिल में हो रहे हों, तो क्या वे अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कर सकते हैं?



अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान 27 मार्च को होने वाला है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक इमरान खान सरकार सुप्रीम कोर्ट से उसके पहले अपनी व्याख्या देने का आग्रह करेगी। लेकिन ये मुमकिन न हुआ, तो संभव है कि अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान टालने की कोशिश की जाए। लेकिन वैसा होने पर राजनीतिक हिंसा फैल सकती है। 27 मार्च को दोनों पक्षों ने इस्लामाबाद में लाखों लोगों की रैली करने का एलान कर रखा है।

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