पाकिस्तान की संसद में विपक्ष के नेता शहबाज शरीफ ने विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि पाक की सेना मौजूदा राजनीतिक संकट में किसी का साथ नहीं दे रही है। समा टीवी के शो 'नदीम मलिक लाइव' में शुक्रवार रात शरीफ ने सेना के साथ अपने संबंधों, नए सेना प्रमुख की नियुक्ति, चुनावी सुधार और मौजूदा राजनीतिक हालात में सेना की भूमिका समेत कई मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने विपक्ष द्वारा लगाए गए इस आरोप का भी खंडन किया कि पाकिस्तान की सेना उनकी पार्टी का साथ दे रही है।
पीएम इमरान के आरोप का दिया जवाब
शहबाज ने कहा कि पीएम इमरान खान आरोप लगा रहे हैं कि पाकिस्तान आर्मी हमारी पार्टी का साथ दे रही है। मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि पाक की सेना किसी का पक्ष नहीं ले रही है। पाक की सेना हमेशा से ईमानदार रही है। हालांकि शहबाज शरीफ ने कहा कि देश के हर सेना प्रमुख के साथ उनके हमेशा अच्छे संबंध रहे हैं क्योंकि उन्होंने रावलपिंडी (सेना मुख्यालय) और इस्लामाबाद (राजनीतिक सरकार की सीट) के बीच एक सेतु का काम किया है।
शहबाज शरीफ ने बताई आगे की योजना
उन्होंने कहा कि इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव जीतने के बाद विपक्ष तेजी से समीक्षा करेगा और विदेशी पाकिस्तानियों के लिए मतदान के अधिकार सहित चुनावी सुधारों में सुधार करेगा। उन्होंने इमरान खान पर संसद के माध्यम से चुनाव सुधार कानून के दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि विदेशी पाकिस्तानियों को वोटिंग का अधिकार मिलना चाहिए, लेकिन इस तरह से कि किसी एक पार्टी को सभी लाभ न मिले और सभी के पास समान अवसर हो। शहबाज ने पुष्टि की कि वे नेशनल असेंबली और सीनेट में विदेशी पाकिस्तानियों के लिए एक-एक सीट आरक्षित करने की योजना बना रहे हैं।
शहबाज शरीफ ने कहा कि वह किसी भी 'माइनस इमरान खान फॉर्मूले' के बारे में नहीं जानते हैं, लेकिन अगर इमरान खान को राजनीतिक और संवैधानिक तरीकों का इस्तेमाल करके राजनीति से नहीं हटाया जाता है, तो पाकिस्तान का भविष्य खतरे में है क्योंकि उनके तहत पाकिस्तान ने सबसे खराब शासन और लाभ के वितरण का अनुभव किया है।
सेना प्रमुख के हटाए जाने की भी अटकलें
समाचार एजेंसी एएनआइ की रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान सेना प्रमुख को हटाने का कदम भरी उठा सकते हैं। इससे हालात और ज्यादा पेंचीदा हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सेना प्रमुख को हटाने से इमरान की पार्टी के नेताओं के कुछ विवादित वीडियो या भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेज बाहर आ सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो विपक्षी दलों को एक बड़ा मौका हाथ लग जाएगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस्लामाबाद स्थित सिंध हाउस पर पीटीआई कार्यकर्ताओं का हमला इमरान की हताशा को उजागर करता है।