फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बना रहेगा तनाव: बाइडन-शी वार्ता के बाद अब अमेरिका-चीन संबंध और बिगड़ने का अंदेशा

Wed, 15 Sep 2021 03:39 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

पश्चिमी मीडिया में इस बात की चर्चा है कि बाइडन प्रशासन चीन पर दबाव बढ़ाने के लिए चीन में दी जाने वाली सब्सिडी की नए सिरे से जांच शुरू करने जा रहा है। इस दौरान इस बात की जांच की जाएगी कि चीन में दी जा रही सब्सिडी से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान पहुंच रहा है। इस जांच के आधार पर चीनी से होने वाले आयात पर नए प्रतिबंध लगाए जाएंगे...
विज्ञापन
जो बाइडन और शी जिनपिंग - फोटो : PTI (File Photo)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पिछले हफ्ते अमेरिका और चीन के राष्ट्रपतियों के बीच फोन पर हुई बातचीत के बारे में सामने आई ताजा जानकारियों से चीन के रुख के लेकर पश्चिमी राजधानियों में चिंता बढ़ गई है। ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स ने मंगलवार को ये खबर प्रमुखता से छापी कि 90 मिनट तक चली फोन वार्ता के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने व्यक्तिगत शिखर वार्ता का प्रस्ताव रखा। लेकिन शी ने इसे नजरअंदाज कर दिया।

विज्ञापन


बाइडन और शी के बीच फोन वार्ता बाइडन की पहल पर हुई। उसी दौरान बाइडन ने सुझाव दिया कि दोनों राष्ट्रपतियों को व्यक्तिगत रूप से मिलना चाहिए, ताकि दोनों देशों में जारी तनाव को घटाया जा सके। बताया जाता है कि बाइडन ने इसके लिए अक्तूबर में जी-20 देशों की होने वाली शिखर बैठक को एक उचित मौका बताया। लेकिन शी ने उस पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की। इससे अमेरिकी और पश्चिमी अधिकारी इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि अमेरिका के साथ अपने रिश्तों में चीन का रुख सख्त बना हुआ है। फाइनेशियल टाइम्स ने कहा है कि दोनों राष्ट्रपतियों की वार्ता से जुड़े अधिकारियों ने उससे बातचीत संबंधी इस विवरण की पुष्टि की है।

अब पश्चिमी मीडिया में इस बात की चर्चा है कि बाइडन प्रशासन चीन पर दबाव बढ़ाने के लिए चीन में दी जाने वाली सब्सिडी की नए सिरे से जांच शुरू करने जा रहा है। इस दौरान इस बात की जांच की जाएगी कि चीन में दी जा रही सब्सिडी से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान पहुंच रहा है। इस जांच के आधार पर चीनी से होने वाले आयात पर नए प्रतिबंध लगाए जाएंगे। खबरों के मुताबिक चीन पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका वॉशिंगटन स्थित ‘ताइपेई इकोनॉमिक एंड कल्चरल रिप्रजेंटेटिव ऑफिस’ का नाम बदल कर ‘ताइवान रिप्रजेंटेटिव ऑफिस’ कर सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

उधर बाइडन-शी वार्ता के बाद चीनी मीडिया में छपी टिप्पणियों के मुताबिक चीन इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं है कि अमेरिका सचमुच चीन के साथ सहयोग करना चाहता है। टिप्पणियों में ध्यान दिलाया गया है कि राष्ट्रपति बनने के तुरंत बाद बाइडन के रुख से लगा था कि वे चीन से संबंध सुधारने को लेकर गंभीर हैं। लेकिन उनके प्रशासन का जो व्यवहार रहा है, उससे ये धारणा गलत साबित हुई है।

चीन के टीकाकारों का रुख लगातार सख्त बना हुआ है। फुदान यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर अमेरिकन स्टडीज की निदेशक वू शिनबो ने वेबसाइट एशिया टाइम्स से कहा- अमेरिका ने चीन के बारे में रणनीतिक रूप से गलत आकलन किया है। उसकी राय बनी है कि चीन उसकी नेतृत्वकारी हैसियत को कमजोर करके अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर दबदबा कायम करना चाहता है। इसीलिए उसने चीन पर प्रतिबंध लगाए हैं।

वू ने कहा कि अमेरिका ने लगातार उन तीन बुनियादी बातों की अवहेलना की है, जिन्हें चीन बर्दाश्त नहीं कर सकता। ये तीन बातें हैं- ‘चीनी प्रकार के समाजवाद’ को चुनौती न दी जाए और उसे लांछित करने का प्रयास न किया जाए, चीन की संप्रभुता को सीमित करने और उसकी विकास प्रक्रिया में रुकावट डालने की कोशिश ना की जाए, और उसकी क्षेत्रीय अखंडता की अनदेखी ना की जाए।

पर्यवेक्षकों का कहना है कि दोनों तरफ के रुख को देखते हुए नहीं लगता कि निकट भविष्य में अमेरिका और चीन के संबंधों में सुधार की कोई गुंजाइश बनेगी। बल्कि इस क्षेत्र में टकराव और बढ़ने की गुंजाइश मजबूत होती जा रही है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें