डॉ. एस. जयशंकर
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत अफगानिस्तान के हालात पर लगातार नजर रखे हुए है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा तालिबान सरकार से जताई गई उम्मीदों को रेखांकित करते हुए उन्होंने यह बात कही।
किर्गिस्तान की राजधानी बिशकेक में किरगिज विदेश मंत्री रुसलेन कजाकबेव के साथ साझा प्रेस कांफ्रेंस में जयशंकर ने यह बात कही। दोनों के बीच बिशकेे में रचनात्मक बातचीत हुई। जयशंकर ने कहा कि कजाकबेव के साथ हुई बातचीत में अफगानिस्तान के घटनाक्रम और उसके क्षेत्र की शांति व सुरक्षा पर असर को लेकर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि हम अफगानिस्तान के घटनाक्रम पर निकट से नजर रखे हुए हैं। ये हमारे लिए चिंताजनक हैं। अफगानिस्तान में किसी भी अनिश्चितता का असर क्षेत्र पर पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की वहां की मौजूदा सरकार से कुछ उम्मीदें हैं। ये उम्मीदें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव क्रमांक UNSCR 2593 में विस्तार से बताई गई हैं।
विदेश मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के इस प्रस्ताव में सर्वसम्मति से कहा गया है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल आतंकवादियों को आश्रय, ट्रेनिंग, प्लानिंग, आतंकियों के वित्त पोषण के लिए नहीं होने देगा। इसमें प्रतिबंधित लश्करे तैयबा व जैशे मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों का भी जिक्र है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि भारत व किरगिज रिपब्लिक की अफगानिस्तान के विकास के प्रति एक समान दृष्टिकोण है।
तालिबान ने मध्य अगस्त में अफगानिस्तान में पश्चिम देशों की समर्थक पूर्ववर्ती निर्वाचित सरकार को बेदखल कर सत्ता पर कब्जा कर लिया है। अब उसका पूरे देश पर नियंत्रण हो गया है। पिछले माह पीएम मोदी ने कहा था कि अफगानिस्तान की नाजुक स्थिति का किसी को फायदा नहीं उठाना चाहिए और अपने स्वार्थों की खातिर उसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। न्यूयॉर्क में 76 वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा था कि यह ध्यान रखना बहुत आवश्यक है कि अफगानिस्तान की सरजमीं का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने और आतंकी हमलों के लिए न किया जाए।
विदेश मंत्री जयशंकर रविवार को किर्गिजिस्तान पहुंचे थे। वे किर्गिजिस्तान, कजाकिस्तान व आर्मेनिया के चार दिन के दौरे पर हैं। उनकी यात्रा का मकसद तीनों मध्य एशियाई देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों का और विस्तार करना है।