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अफगानिस्तान संकट : अफगान महिलाओं के लिए 90 के दशक से अलग नहीं होंगे हालात

Thu, 02 Sep 2021 07:14 AM IST
Kuldeep Singh अमर उजाला रिसर्च टीम, काबुल

सार

  • विशेषज्ञों ने कहा- दुनिया के सभी देश दूरी बनाने के बजाय तालिबान से बात करके बनाएं दबाव 
  • महिला अधिकारों के बाद उसे पलटने लगा है तालिबान, रोक-टोक और बढ़ेगी 
  • काबुल पर कब्जे के बाद पहली प्रेस वार्ता में तालिबान ने महिलाओं को इस्लाम के अनुसार हक देने की जताई थी प्रतिबद्धता
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अफगानिस्तान में महिलाएं - फोटो : pixabay
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विस्तार
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महिला और मानवाधिकार को लेकर नई सोच का दावा कर रहे तालिबान पर विशेषज्ञ भरोसा करने को तैयार नहीं है। उनका कहना है नया तालिबानी शासन 90 के दशक से अलग नहीं होगा।

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कनाडाई थिंक टैंक इंटरनेशनल फोरम फॉर राइट्स एंड सिक्योरिटी (आईएफएफआरएएस) के लिए सलमा कोसर आसिफ ने लिखा, तालिबान ने पिछली बार के बजाय इस दफा खुद की उदार छवि पेश करने की कोशिश की। काबुल पर कब्जे के बाद पहली प्रेस वार्ता में तालिबान ने महिलाओं को इस्लाम के अनुसार हक देने की प्रतिबद्धता जताई थी। लेकिन अब भविष्य अनिश्चितताओं से भरा नजर आने लगा है।

महिला अधिकारों के बाद उसे पलटने लगा है तालिबान 
विशेषज्ञों का कहना है आतंकी संगठन महिला अधिकारों को लेकर किए वादे से पलटने लगा है। जिसमें उनकी सहशिक्षा पर पाबंदी लगाना शामिल है। यह फैसला शेख अब्दुलबकी हक्कानी के शिक्षा मंत्री बनने के फौरन बाद सामने आया है। तालिबानी अधिकारियों का कहना है सहशिक्षा जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है और यह व्यवस्था बंद कर देनी चाहिए। हक्कानी के मुताबिक शरिया कानून के तहत ही शिक्षण गतिविधियां संचालित होंगी।
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दुनिया दूरी बनाने के बजाय उससे बात कर दबाव बनाएं 
कौसर आसिफ ने कहा, मौजूदा हालात में तालिबान पर पहले से कहीं ज्यादा नजरें हैं। वैश्विक समुदाय को दूरी रखने के बजाय बात करके उस पर दबाव बनाना चाहिए। अफगानिस्तान ने कई वैश्विक संधियों और अनुबंधों पर दस्तखत किए हैं।

महिलाओं पर हमलों से संयुक्त राष्ट्र चिंतित
इनका नागरिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और मानवाधिकार की अवहेलना किए बिना पालन करने की जरूरत है। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र समिति ने भी तालिबान को महिला-बालिका अधिकारों का सम्मान और सुरक्षा करने का आह्वान किया है। समिति ने बीते 20 वर्षो में देश के विकास में योगदान देने वाली महिलाओं पर हमले को लेकर चिंता जताई है।

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