इसके साथ ही सर्वे में शामिल कम से कम 60 फीसदी देशों में कमजोर या संवेदनशील लोगों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा देखी गई। रिपोर्ट के अनुसार इसमें बच्चे और किशोर (72 फीसदी), वयस्क (70 फीसदी) और प्रसवपूर्व या प्रसवोत्तर सेवाओं की आवश्यकता वाली महिलाएं (61 फीसदी) भी प्रभावित हुए।
करीब 67 फीसदी मामलों में परामर्श और मनोचिकित्सा सेवाएं भी प्रभावित हुईं। यहां तक कि स्कूल और कार्यस्थल की मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। डब्ल्यूएचओ के सर्वेक्षण के अनुसार महामारी के दौरान ऐसे कम से कम तीन चौथाई स्थानों पर आंशिक रूप से व्यवधानों के बारे में बताया गया है।
डब्ल्यूएचओ में आपातकालीन सेवाओं के प्रमुख ने सोमवार को कहा कि दुनियाभर में हर दस में से एक व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकता है। कोविड-19 पर सोमवार को हुई 34 सदस्यीय कार्यकारी बोर्ड की बैठक में डॉ. माइकल रायन ने यह बात कही।
डॉ. रायन ने कहा कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में संख्या में परिवर्तन हो सकता है लेकिन अंततः इसका अर्थ यही है कि विश्व की बड़ी आबादी खतरे में है। विशेषज्ञ पहले से ही कहते रहे हैं कि बताई जा रही संख्या से कहीं अधिक लोग संक्रमण के शिकार हैं।