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कोविड-19 ने अधिकतर देशों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर डाला बुरा असर: डब्ल्यूएचओ

Mon, 05 Oct 2020 07:23 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा
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विश्व स्वास्थ्य संगठन - फोटो : सोशल मीडिया
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से कराए गए एक सर्वेक्षण में सामने आया है कि कोविड-19 महामारी ने दुनियाभर के 93 फीसदी देशों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। डब्ल्यूएचओ की ओर से सोमवार को जारी यह सर्वे जून से अगस्त के बीच 130 देशों में किया गया था। 

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सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार करीब एक तिहाई (35 फीसदी) देशों ने आपातकालीन हस्तक्षेपों के लिए व्यवधान की सूचना दी। वहीं, 30 फीसदी देशों को मानसिक और न्यूरोलॉजिकल विकारों के लिए दवाओं तक पहुंच में दिक्कत हुई। इसके साथ ही कई देशों ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर व्यवधान का सामना किया।


इसमें लंबे समय तक दौरे का सामना करने वाले लोगों के लिए, गंभीर पदार्थ का उपयोग निकासी सिंड्रोम, और प्रलाप, अक्सर एक गंभीर अंतर्निहित चिकित्सा स्थिति का संकेत है। और 30% ने मानसिक, न्यूरोलॉजिकल और पदार्थ के उपयोग विकारों के लिए दवाओं तक पहुंच में व्यवधान की सूचना दी।

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स्कूलों और कार्यस्थलों पर सेवाएं भी प्रभावित

इसके साथ ही सर्वे में शामिल कम से कम 60 फीसदी देशों में कमजोर या संवेदनशील लोगों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा देखी गई। रिपोर्ट के अनुसार इसमें बच्चे और किशोर (72 फीसदी), वयस्क (70 फीसदी) और प्रसवपूर्व या प्रसवोत्तर सेवाओं की आवश्यकता वाली महिलाएं (61 फीसदी) भी प्रभावित हुए।  

करीब 67 फीसदी मामलों में परामर्श और मनोचिकित्सा सेवाएं भी प्रभावित हुईं। यहां तक कि स्कूल और कार्यस्थल की मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। डब्ल्यूएचओ के सर्वेक्षण के अनुसार महामारी के दौरान ऐसे कम से कम तीन चौथाई स्थानों पर आंशिक रूप से व्यवधानों के बारे में बताया गया है।
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हर दस में से एक व्यक्ति कोरोना से संक्रमित

डब्ल्यूएचओ में आपातकालीन सेवाओं के प्रमुख ने सोमवार को कहा कि दुनियाभर में हर दस में से एक व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकता है। कोविड-19 पर सोमवार को हुई 34 सदस्यीय कार्यकारी बोर्ड की बैठक में डॉ. माइकल रायन ने यह बात कही। 

डॉ. रायन ने कहा कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में संख्या में परिवर्तन हो सकता है लेकिन अंततः इसका अर्थ यही है कि विश्व की बड़ी आबादी खतरे में है। विशेषज्ञ पहले से ही कहते रहे हैं कि बताई जा रही संख्या से कहीं अधिक लोग संक्रमण के शिकार हैं। 
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