केमिकल बनाने वाली एक कंपनी के प्रबंधक ने टोक्यो के अखबार जापान टाइम्स से कहा- ‘कोरोना वायरस संक्रमण को संभालने के लिहाज से हो सकता है कि एलडीपी ही बेहतर विकल्प हो। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि सत्ताधारी गठबंधन को अधिक सीटें मिलें। मैं चाहता हूं कि ये गठबंधन अभी की तुलना में कम सीटों के साथ जीते, ताकि उसे ठीक से काम करने की जरूरत महसूस हो।’
विश्लेषकों का कहना है कि जापान में असल समस्या मजबूत विकल्प की कमी है। इसलिए एलडीपी के हाथ से सत्ता चली जाएगी, ऐसी संभावना जताने वाले लोग बहुत कम संख्या में हैं। आम अनुमान यही है कि एलडीपी गठबंधन को सीटों का नुकसान होगा, लेकिन वह बहुमत हासिल कर लेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि एनडीपी गठबंधन में शामिल कोमीतो पार्टी की सीटें बढ़ सकती हैं। इसका लाभ सत्ताधारी गठबंधन को मिलेगा। लेकिन तब भी सुगा के नेतृत्व को लेकर पैदा हुए शक कायम रहेंगे। जापान की संसद के निचले सदन- प्रतिनिधि सभा को चुनने लिए मतदान 28 सितंबर को होगा। सदन में कुल 465 सीटें हैं। फिलहाल सत्ताधारी गठबंधन के पास इनमें से 305 सीटें हैं।
एक जनमत सर्वेक्षण में ये सवाल पूछा गया था कि अगर सुगा हटते हैं, तो उनकी जगह प्रधानमंत्री किसे बनना चाहिए। उस पर सबसे ज्यादा लोगों ने कोरोना टीकाकरण के प्रभारी मौजूदा मंत्री तारो कोनो का नाम लिया। कंपनियों के सर्वे में भी उन्हें 39 फीसदी अधिकारियों का समर्थन मिला। कोनो के बाद सबसे लोकप्रिय रक्षा मंत्री शिगेरू इशिबा हैं। पर्यवेक्षकों के मुताबिक इससे साफ है कि जापान में ज्यादातर लोगों के दिमाग में अभी कोरोना महामारी से निपटना सबसे बड़ा मुद्दा है।