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क्या लाल ग्रह पर नहीं है जीवन?: मंगल पर जीव पाए जाने को लेकर अभी ज्यादा उम्मीद ना जोड़ें!

Sat, 20 Nov 2021 03:55 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

वैज्ञानिकों का कहना है कि माइक्रोफॉसिल को समझना हमेशा समस्याग्रस्त रहा है। यहां तक कि धरती पर भी पुरानी चट्टानों के टुकड़ों और जीवाश्म सूक्ष्म जीवाणुओं के बीच फर्क करना मुश्किल बना रहा है। इसीलिए नए अध्ययन से जुड़े वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह पर दिखने वाले कथित जीवाश्मों की व्याख्या सावधानी से करने की सलाह दी है...
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मंगल ग्रह - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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मंगल ग्रह पर जीवन की उम्मीद लगाए बैठे लोगों के लिए एक निराशाजनक खबर है। वैज्ञानिकों के एक नए अध्ययन में कहा गया है कि जिन जीवाश्म (फॉसिल) साक्ष्यों को उस ग्रह पर जीवन का संकेत समझा गया है, वे भ्रामक हो सकते हैं। धरती से कई रोबोट संचालित यान मंगल ग्रह पर भेजे गए हैं। उन्हें वहां जीवन के संकेत का पता लगाने के मकसद से भेजा गया है। आम तौर पर मंगल ग्रह की सतह शुष्क है। लेकिन उस पर कुछ सूक्ष्म माइक्रोफॉसिल नजर आए हैं, जिन्हें कुछ वैज्ञानिकों ने इस ग्रह पर अतीत या वर्तमान में जीव मौजूद होने का संकेत समझा है।

छद्म जीवाश्मों की थ्योरी

लेकिन लंदन से प्रकाशित जर्नल ऑफ जियोलॉजिकल में छपी एक ताजा अध्ययन रिपोर्ट में माइक्रोफॉसिल संकेतों की व्याख्या करते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। एडिनबरा विश्वविद्यालय में एस्ट्रोबायोलॉजिस्ट सीन मैकमोहन और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में जियो-बॉयोलॉजिस्ट जूली कॉस्मिड्स ने अपनी अध्ययन रिपोर्ट मे कहा है कि वैज्ञानिकों को गैर-जैवीय खनिज पदार्थों पर भी जरूर ध्यान देना चाहिए। इनमें कई ऐसे होते हैं, जो फॉसिल की तरह नजर आते हैं।

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इस अध्ययन रिपोर्ट में दर्जनों ऐसे गैर-जैवीय (नॉन बॉयोलॉजिकल) प्रक्रियाओं का जिक्र है, जिनसे छद्म जीवाश्म पैदा होते हैं। यानी वे जीवाश्म जैसे दिखते हैं, लेकिन असल में वे जीवाश्म नहीं होते। इन शोधकर्ताओं के मुताबिक मंगल ग्रह पर जो जीवाश्म दिखे हैं, उनके साथ भी ऐसी ही बात हो सकती है। वेबसाइट साइंसअलर्ट.कॉम पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक मैकमोहन ने कहा है- ‘आगे चल कर मार्स पर गए घुमंतू यान (रोवर) जरूर ऐसी कोई चीज हासिल करेंगे, जो जीवाश्म की तरह नजर आएंगे। इसलिए हमें उनकी रासायनिक संरचना को समझने के लिए खुद सक्षम बनाना पड़ेगा।’

मशरूम मौजूद होने के मिले थे सबूत

जानकारों का कहना है कि ताजा अध्ययन रिपोर्ट ने मंगल ग्रह को लेकर रहस्य और बढ़ा दिया है। लाल ग्रह नाम से चर्चित मंगल को लेकर हमेशा से रोमांच मौजूद रहा है। इसे लेकर कई काल्पनिक बातें भी मीडिया में प्रचलित रही हैं। एक समय ऐसी खबर आई थी कि वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह पर मशरूम मौजूद होने के साक्ष्य मिल गए हैं। वहां जीवाणुओं के मौजूद होने की बातें भी जब तब मीडिया में चर्चित होती रही हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि माइक्रोफॉसिल को समझना हमेशा समस्याग्रस्त रहा है। यहां तक कि धरती पर भी पुरानी चट्टानों के टुकड़ों और जीवाश्म सूक्ष्म जीवाणुओं के बीच फर्क करना मुश्किल बना रहा है। इसीलिए नए अध्ययन से जुड़े वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह पर दिखने वाले कथित जीवाश्मों की व्याख्या सावधानी से करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि ऐसा ना करने पर गलत निष्कर्ष पर पहुंचने की आशंका बनी रहेगी।

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इन वैज्ञानिकों ने कहा है कि मंगल ग्रह की रासायनिक और भौतिक संरचना के बारे में अधिक गंभीर प्रयोगों की जरूरत है। जूलीकॉस्मिड्स ने कहा है- ‘हम अतीत में भी जीवन के संकेतों को लेकर मूर्ख बने हैं। धरती और उल्कापिंडों पर जिन चीजों को पहले फॉसिल समझा गया, बाद के प्रयोगों और अध्ययनों से जाहिर हुआ कि उनका किसी प्रकार के जीव से संबंध नहीं है।’

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