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ईरान जंग के बीच US ने टेस्ट की डूम्सडे मिसाइल!

अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Updated Thu, 05 Mar 2026 07:55 PM IST

पश्चिम एशिया में जंग की आग पहले से ही भड़क रही है… ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच बढ़ते टकराव ने दुनिया की सांसें थाम दी हैं। लेकिन इसी बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने वैश्विक सुरक्षा को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। अमेरिका ने अपनी बेहद घातक ‘मिनटमैन-III’ बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण कर दिया है एक ऐसी मिसाइल जो परमाणु हमला करने में सक्षम है और जिसकी ताकत हिरोशिमा पर गिराए गए बम से कई गुना ज्यादा मानी जाती है। आधी रात को कैलिफोर्निया के तट से दागी गई इस मिसाइल ने हजारों किलोमीटर दूर प्रशांत महासागर में अपने लक्ष्य को भेद दिया। सवाल अब यह है क्या यह सिर्फ एक रूटीन टेस्ट था, या दुनिया के लिए एक सख्त संदेश?

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और Iran के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी बेहद घातक बैलिस्टिक मिसाइल LGM-30 Minuteman III का सफल परीक्षण किया है। यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है और इसे अमेरिका की रणनीतिक परमाणु ताकत का अहम हिस्सा माना जाता है। अमेरिकी सेना ने इसे नियमित परीक्षण बताया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे ईरान के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।

अमेरिकी सेना के अनुसार यह परीक्षण मंगलवार रात कैलिफोर्निया के तट पर स्थित वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से किया गया। रात करीब 11 बजे लॉन्च की गई इस मिसाइल ने हजारों किलोमीटर की दूरी तय करते हुए प्रशांत महासागर में अपने निर्धारित लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेद दिया।

अमेरिकी स्पेस फोर्स ने बताया कि ‘जीटी-254’ नाम का यह रॉकेट बिना किसी असली हथियार के लॉन्च किया गया था। यह परीक्षण केवल मिसाइल की सटीकता और तकनीकी क्षमता को परखने के लिए किया गया था। मिसाइल ने उड़ान भरने के बाद प्रशांत महासागर में स्थित मार्शल द्वीपसमूह के पास अपने लक्ष्य को सटीकता से भेदा।

विशेषज्ञों के मुताबिक मिनटमैन III दुनिया की सबसे ताकतवर अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक है। यह मिसाइल परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम है, जिसकी ताकत Atomic bombing of Hiroshima में इस्तेमाल किए गए बम से करीब 20 गुना ज्यादा बताई जाती है। यही वजह है कि इसे अमेरिका की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का अहम स्तंभ माना जाता है।

इस परीक्षण के बारे में जानकारी देते हुए United States Space Force और Air Force Global Strike Command ने कहा कि यह एक नियमित सैन्य अभ्यास था। 576वें फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल कैरी रे ने कहा कि ऐसे परीक्षणों से मिसाइल सिस्टम के अलग-अलग हिस्सों की कार्यक्षमता का आकलन करने में मदद मिलती है।

उन्होंने बताया कि इन परीक्षणों का मकसद अमेरिका की परमाणु शक्ति के जमीनी हिस्से को हमेशा तैयार रखना है, ताकि किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में देश की रणनीतिक क्षमता मजबूत बनी रहे।

हालांकि यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। हाल ही में Israel और अमेरिका की ओर से ईरान पर हमले किए गए थे। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली हुसैनी ख़ामेनेई की मौत हो गई थी, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में संघर्ष और तेज हो गया।

इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त रुख दिखाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो ईरान के खिलाफ और भी बड़े सैन्य अभियान चलाए जा सकते हैं।

हालांकि अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि मंगलवार का मिसाइल परीक्षण मौजूदा युद्ध से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं है और इसकी योजना कई साल पहले ही तैयार कर ली गई थी। इसके बावजूद वैश्विक रणनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ऐसे समय में इस तरह का परीक्षण अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा संदेश देता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब दुनिया पहले ही युद्ध और ऊर्जा संकट जैसी चुनौतियों से जूझ रही हो, तब परमाणु क्षमता वाली मिसाइलों का परीक्षण वैश्विक सुरक्षा को लेकर चिंताओं को और बढ़ा देता है। यही कारण है कि इस परीक्षण के बाद एक बार फिर परमाणु हथियारों और सैन्य शक्ति को लेकर दुनिया भर में बहस तेज हो गई है।

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