रूस ने अफगानिस्तान में तालिबान शासन को औपचारिक रूप से मान्यता देने की घोषणा की है। गुरुवार को इस फैसले के बारे में रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसे अफगानिस्तान के नवनियुक्त राजदूत गुल हसन से परिचय पत्र प्राप्त हो गए हैं। अफगानिस्तान में तालिबान शासन को औपचारिक रूप से मान्यता देने वाला पहला देश बनने के संबंध में रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अफगान सरकार को आधिकारिक मान्यता मिलने से दोनों देशों के बीच 'उत्पादक द्विपक्षीय सहयोग' को बढ़ावा मिलेगा।
तालिबान के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में पुष्टि की है कि औपचारिक रूप से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को मान्यता देने के रूसी संघ के फैसले से अवगत करा दिया है। रूस धीरे-धीरे तालिबान के साथ संबंध बना रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने तालिबान को आतंकवाद से लड़ने में सहयोगी बताया है। रूसी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि हमारा मानना है कि अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात की सरकार को आधिकारिक मान्यता देने से हमारे देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादक द्विपक्षीय सहयोग के विकास को बढ़ावा मिलेगा।
आपको बता दें कि अफगानिस्तान में साल 2021 में तालिबान शासन लागू हुआ था। अमेरिकी सेना के देश छोड़ने के बाद तालिबानी नेताओं ने देश का नेतृत्व अपने हाथों में ले लिया। फिलहाल देश का विदेश मंत्रालय आमिर खान मुत्ताकी संभाल रहे हैं। रूस ने तालिबान को अब गैरकानूनी संगठनों की सूची से हटा दिया है। रूसी विदेश मंत्रालय की घोषणा के बाद अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस फैसले को ऐतिहासिक कदम बताया। तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे 'अन्य देशों के लिए एक अच्छा उदाहरण' बताया है।
आपको बता दें कि जब अगस्त 2021 में तालिबान ने काबुल पर कब्जा किया था, तब इसे भारत के लिए झटका माना जा रहा था। लेकिन, पिछले कुछ वर्षों में दोनों पक्षों के बीच संबंधों में काफी सुधार हुआ है। अभी कुछ दिन पहले ही भारत और तालिबान में शीर्ष स्तर पर पहला संपर्क हुआ था, जिसमें भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने तालिबान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी से बात की थी।