नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने शुक्रवार को देश की अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली. उन्होंने यह पद केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के तीन दिन बाद संभाला, जिन्होंने देश में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद इस्तीफा दे दिया था. देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश का पद संभाले के बाद कार्की के सामने अब राजनीतिक संकट के बीच नेपाल का नेतृत्व करने की एक बड़ी चुनौती है.
सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री बन गई हैं। उन्हें राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने राष्ट्रपति भवन शीतल निवास में शपथ दिलाई। सुशीला कार्की के शपथ ग्रहण समारोह में उपराष्ट्रपति रामसहाय यादव, काठमांडू के मेयर बालेन शाह, मुख्य न्यायाधीश प्रकाश सिंह रावत उपस्थित रहे। माना जा रहा है कि सुशीला कार्की के शपथ ग्रहण के बाद नेपाल में अंतरिम कैबिनेट आज रात ही पहली बैठक कर सकती हैं। राष्ट्रपति ने यह नियुक्ति संविधान की धारा 61 का हवाला देते हुए की। धारा 61 (4) के अनुसार राष्ट्रपति का मुख्य कर्तव्य संविधान का पालन और संरक्षण करना तथा राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना है।
इससे पहले शुक्रवार को राष्ट्रपति के कार्यालय शीतल निवास में दोपहर दो बजे से शाम साढे सात बजे तक चली उच्च स्तरीय बैठक में संसद को भंग करने और कार्की को शपथ दिलाने पर सहमति बनी। जेन-जी के प्रतिनिधियों ने दो दिन से चल रही वार्ता में स्पष्ट किया था कि संसद भंग किए बिना वे नई सरकार का गठन स्वीकार नहीं करेंगे। शुक्रवार को दिन भर हुए विचार-विमर्श के बाद पौडेल ने शाम को सुशीला कार्की को निर्णायक वार्ता के लिए शीतल निवास बुलाया। इस बैठक में अधिवक्ता ओमप्रकाश अर्याल, रमण कर्ण और जेन-जी समूह की ओर से सुदन गुरुंग उपस्थित थे।
अंतरिम सरकार के नए प्रधानमंत्री का कार्यालय सिंह दरबार में निर्माणाधीन गृह मंत्रालय के भवन में बनाया जाएगा। नेपाल के मुख्य सचिव एकनारायण अर्याल के नेतृत्व में सचिवों की टोली ने विभिन्न भवनों का दौरा कर इस भवन का चयन किया। एक सचिव ने बताया, कई विकल्पों पर विचार किया गया लेकिन अधिकांश भवन आंदोलन के दौरान क्षतिग्रस्त कर दिए जाने के कारण गृह मंत्रालय के निर्माणाधीन भवन को ही प्रधानमंत्री कार्यालय के लिए सही पाया गया।