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पलायन से सूने गांवों में धार्मिक आयोजनों से लौट रही रौनक, कठुली चंपाधार में भव्य मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा

टिहरी बांध निर्माण के बाद पलायन की मार झेल रहे प्रतापनगर क्षेत्र के धारमंडल और रैका पट्टी के गांवों में अब धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन नई रौनक बिखेर रहे हैं। कभी ग्रामीणों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाले इन गांवों में पलायन के कारण वीरानी बढ़ी है। क्षेत्र के दर्जनों गांवों में 50 प्रतिशत से अधिक पलायन होने के बीच कठुली चंपाधार में मंदिर और आश्रम का निर्माण ग्रामीणों के लिए आस्था के साथ आपसी मेल-मिलाप का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। धारमंडल और रैका पट्टी के बीच स्थित कठुली चंपाधार में पूर्व सैनिक उत्तम भंडारी की पहल पर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज के आश्रम, धर्मशाला और पंचनाम देवी-देवताओं के मंदिर का निर्माण कराया गया है। यहां भगवान शिव-पार्वती सहित विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा कर विधिवत स्थापना की गई। तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन का शुभारंभ जल कलश यात्रा के साथ हुआ। इसके बाद हवन-पूजन और भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के ग्रामीणों, श्रद्धालुओं और विभिन्न स्थानों से पहुंचे लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार की राज्यमंत्री सोना सजवाण, जिला पंचायत उपाध्यक्ष मान सिंह रौंतेला, पूर्व राज्यमंत्री प्रेम दत्त जुयाल, प्रदीप रमोला सहित कई लोग शामिल हुए। वर्षों पुरानी प्रतिज्ञा को उत्तम भंडारी ने किया पूरा कार्यक्रम के संयोजक एवं पूर्व सैनिक उत्तम भंडारी ने बताया कि उन्होंने काफी समय पहले इस स्थान पर मंदिर निर्माण का संकल्प लिया था। वर्षों के प्रयास के बाद अब यह संकल्प पूरा हो पाया है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य क्षेत्र में धार्मिक आस्था और सद्भावना का वातावरण तैयार करना है। उत्तम भंडारी के अनुसार, टिहरी बांध निर्माण के बाद इस क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोगों का पलायन हुआ। इसके चलते आसपास के गांवों में धार्मिक गतिविधियां भी प्रभावित हुईं और लोगों को सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना करने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता था। ऐसे में मंदिर और आश्रम का निर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से इस स्थान पर विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों के माध्यम से पलायन कर चुके ग्रामीणों को भी अपने गांव और क्षेत्र में लौटकर परिचितों, रिश्तेदारों तथा पुराने साथियों से मिलने का अवसर मिल रहा है। मंदिर से ग्रामीणों को मिलेगा पूजा-अर्चना का अवसर आचार्य महावीर प्रसाद ने बताया कि यहां तीन दिवसीय मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। मंदिर के निर्माण से आसपास के ग्रामीणों को पूजा-अर्चना के लिए स्थान उपलब्ध होगा और आने वाले समय में क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। आचार्य आशीष भट्ट ने कहा कि स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज के आशीर्वाद से उत्तम भंडारी और स्थानीय लोगों के सहयोग से यहां मंदिर एवं धर्मशाला का निर्माण किया गया है। इससे क्षेत्र की धार्मिक आस्था को मजबूती मिलेगी और श्रद्धालुओं को एक स्थान पर एकत्र होने का अवसर मिलेगा। पलायन कर चुके लोगों के लिए मेल-मिलाप का केंद्र देहरादून से पहुंचीं नीलम रावत कैलाशी ने बताया कि प्रभु प्रेमी संघ और स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज से जुड़ाव के कारण उन्हें इस धार्मिक आयोजन में शामिल होने का अवसर मिला। उन्होंने इस तरह के आयोजनों को श्रद्धालुओं के आपसी जुड़ाव का माध्यम बताया। पूर्व राज्यमंत्री प्रेम दत्त जुयाल ने कहा कि धार्मिक आयोजन समाज में सद्भावना और आपसी भाईचारे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे कार्यक्रमों से वर्षों पहले गांव छोड़कर जा चुके लोगों को भी अपने क्षेत्र में आने और पुराने परिचितों से मिलने का अवसर मिलता है। वहीं, ग्रामीण सीमा भंडारी और लक्ष्मी भट्ट ने मंदिर निर्माण का श्रेय उत्तम भंडारी को देते हुए कहा कि उन्होंने वर्षों से वीरान पड़ी भूमि पर मंदिर का निर्माण कराकर लोगों को धार्मिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया है। इससे न केवल स्थानीय लोगों को पूजा-अर्चना की सुविधा मिलेगी, बल्कि पलायन कर चुके ग्रामीणों को भी अपने गांव लौटने का एक अवसर मिलेगा। आस्था के बहाने गांवों से जुड़ रहे लोगों के रिश्ते कठुली चंपाधार में मंदिर, आश्रम और धर्मशाला का निर्माण केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पलायन से प्रभावित क्षेत्र में सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करने की पहल भी है। धार्मिक आयोजनों के जरिए गांवों से दूर हो चुके लोगों का अपने क्षेत्र से संपर्क बना रह रहा है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि भविष्य में भी यहां धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहेगा, जिससे क्षेत्र की परंपराओं, आपसी भाईचारे और सामुदायिक भावना को नई ऊर्जा मिलेगी।

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