आखिरकार नगर निगम में मेयर पद के लिए पार्टी से टिकट न मिलने से नाराज अपनी पत्नी को निर्दलीय मैदान में उतारने वाले पूर्व पालिकाध्यक्ष राजेंद्र सिंह रावत फिर से पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में खड़े हुए हैं। उनके बगावती सुर थमने से पार्टी में राहत है। उन्होंने कहा कि उनका मकसद पार्टी से बगावत करना नहीं अपनी पीड़ा को शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाना था। कहा कि पार्टी को खड़ा करने में उन्होंने अपनी पूरी जवानी लगा दी। जब कार्यकर्ता की उपेक्षा होती है तो पीड़ा होती है। उनके खिलाफ भी साजिश और षडयंत्र रचे गए। ऐसा करने वाले बेनकाब होंगे। शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें कार्यकर्ताओं की उपेक्षा न करने का आश्वासन दिया है। ऐसे में वह सभी गिले-शिकवे भुलाकर पार्टी और पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में खड़े रहेंगे। पार्टी को मजबूती देना ही उनका एकमात्र दायित्व है। वह पूरी निष्ठा के साथ पार्टी प्रत्याशी को जिताने का कार्य करेंगे।