हल्द्वानी के श्री रामलीला मैदान में आयोजित दिन की लीला में सीता खोज, लंका दहन, सुग्रीव राज्याभिषेक की लीला का सुंदर वर्णन व्यास पुष्कर दत्त शास्त्री ने किया। शबरी के कहने पर राम किष्किन्धा पर्वत की ओर जाते हैं जहां उनकी मुलाकात हनुमान और सुग्रीव से होती है। मित्रता होने के बाद सब सीता की खोज में सब जुट जाते हैं। हनुमान जी लंका पहुंचते हैं और अशोक वाटिका में माता सीता से मिलते हैं। भूख लगने पर माता सीता से आज्ञा ले कर फल खाकर और पूरी वाटिका उजाड़ डालते हैं। रावण की आज्ञा पर मेघनाद उन्हें पकड़कर रावण के दरबार ले आता है, जहां उनकी पुंछ में आग लगा दी जाती है। इसके बाद हनुमान पूरी लंका का जला देते हैं। युवा सामाजिक एवं सांस्कृतिक समिति शीशमहल की रामलीला में ब्रह्मा जी ने रावण, कुंभकरण और विभीषण को वरदान दिया गया। वहां मुख्य अतिथि सुनील शारदा, नीरज शारदा, डाॅ. पंकज महेश आदि थे। नैनीताल नगर के सूखाताल में रविवार को सूर्पणखा नासिका छेदन की लीला का मंचन किया गया। रामसेवक सभा तल्लीताल रामलीला समिति व शेर का डांडा में सीताहरण से लीला की शुरुआत हुई। हरण के दौरान सीता के विरह हा जगतीश देव रघुराया..गीत पर लोगों की आखें भर आई। सीता की खोज में निकले राम के विरह गीत कोमलांगी सिया प्यारी तू कहां, ढूंढता फिरता हूं तुझको मैं यहां..... गीत ने लोगों को भाव विभोर कर दिया। इसके बाद जटायु मरण, श्रीराम-हनुमान मिलन व राम-सुग्रीव मैत्री की लीला दिखाई गई। आदर्श रामलीला कमेटी सूखाताल की ओर से सूर्पणखा नासिका छेदन, खर-दूषण वध और रावण-मारीच संवाद की लीला दिखाई गई। यहां सूर्पणखा के नृत्य को सराहा गया।