चंपावत के शीत जल मात्स्यिकी अनुसंधान केंद्र के प्रयोगिक मत्स्य केंद्र में असेला मछली के खान पान पर शोध कार्य किया जाएगा। पहाड़ी की असेला मछली को स्नो ट्राउट के नाम से जाना जाता है। विशेषज्ञ लार्वल फीड पर काम करेंगे। असेला मछली नदी किनारे मिल जाती है। शोध के बाद मछली को तालाब में पालना आसान होगा। शोध कार्य तीन साल तक किया जाएगा। बाइट-डॉ. पंकज कुमार, केंद्री प्रभारी