कर्णप्रयाग सकण्ड गांव तक सड़क नहीं पहुंच पाई है। ग्रामीण कई सालों से लगातार सड़क की मांग करते आ रहे है। लेकिन आज तक सड़क की मांग अधूरी है। ऐसे में आक्रोशित ग्रामीणों ने जूलूस निकालर प्रदर्शन किया। और तहसील परिसर में धरना शुरू किया। ग्रामीणों ने तहसील परिसर में करीब चार घंटे तक धरना दिया। ग्रामीणों का कहना कि तब तक उनकी मांगे पूरी नहीं हो जाती। उनका धरना जारी रहेगा। ग्राम प्रधान शिवानी चौधरी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने अपर बाजार से तहसील परिसर तक जूलूस निकाला। और तहसील परिसर में धरना शुरू किया। ग्राम प्रधान शिवानी चौधरी, नर्मदा देवी, उषा देवी, अंकिता देवी, पुष्पा देवी, अमित सिंह आदि ने बताया कि सड़क सुविधा न होने से ग्रामीणों को आज भी मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए नौ किमी की पैदल दूरी नापनी पड़ती है। दिक्कतें तब अधिक बढ़ जाती है जब गांव में कोई बीमार हो जाता है। या कोई गर्भवती या बुजुर्ग व्यक्ति हो। ऐसे में सड़क न होने से बीमार लोगों को डंडी के माध्यम से सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र सिंह ने कहा कि गांव में उत्तम किस्म की दालें और आलू होते है। लेकिन सड़क न होने से ये चीजें बाजारों तक नहीं पहुंच पाती है। और गांव में ही सड़ जाती है। यदि सड़क सुविधा का लाभी मिलता। तो निश्चित ही यहां के काश्तकारों की आमदनी अच्छी होती। ग्रामीणों का कहना है कि पहले गांव में करीब 45 परिवार थे। लेकिन धीरे-धीरे गांव से पलायन होने लगा। और अब गांव में 22 के करीब परिवार बसे है। जिनमें अधिकतर बुजुर्ग लोग शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार सर्वे होने के बाद भी आज तक सड़क कटिंग का काम शुरू नहीं हो पा रहा है। नेताओं और अधिकारियों के आश्वासन सुनते सुनते साल बीत रहे है। लेकिन ग्रामीणों की सड़क की समस्या हल नहीं हो पा रही है। ऐसे में अब ग्रामीणों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।