समाजवादी पार्टी ने प्रदेश सचिव डॉ. सुभाष राजभर का सियासी कद बढ़ाते हुए उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया है। पार्टी के प्रति उनके समर्पण और सक्रियता को देखते हुए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यह जिम्मेदारी दी है। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद डॉ. सुभाष राजभर ने बसपा प्रमुख मायावती के सपा पर किए गए हमले का जवाब देते हुए सामाजिक न्याय और पीडीए के मुद्दे पर पार्टी का पक्ष रखा। मायावती ने अखिलेश यादव के ब्राह्मण कार्ड को लेकर सपा पर सियासी तंज कसा था। उन्होंने कहा था कि सपा गिरगिट की तरह रंग बदलती है। इस पर डॉ. सुभाष राजभर ने पलटवार करते हुए कहा कि मायावती को सपा को सलाह देने के बजाय अपनी पार्टी की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मायावती की पहचान पार्टी में कार्रवाई करने के लिए ज्यादा रही है। बसपा के कार्यकर्ता भी उनके कई फैसलों से नाखुश रहते हैं। डॉ. सुभाष राजभर ने हाल में बसपा से निष्कासित किए गए पूर्व राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता डॉ. अशोक सिद्धार्थ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बसपा में लंबे समय तक काम करने वाले नेताओं पर भी कार्रवाई की जाती रही है। ऐसे में मायावती को सपा की राजनीतिक रणनीति पर टिप्पणी करने से पहले अपने संगठन की स्थिति पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सपा ‘पीडीए’ की हितैषी रही है और सामाजिक न्याय के लिए लगातार काम करती आ रही है। पीडीए में ‘पी’ का अर्थ पिछड़ा ही नहीं, बल्कि पंडित और पैरेंट्स भी समझा जा सकता है। सुभाष राजभर ने कहा कि हिंदू समाज में ब्राह्मण हमेशा अभिभावक की भूमिका में रहा है। इसलिए ब्राह्मण समाज को सपा की सामाजिक न्याय की राजनीति से जोड़कर देखना गलत नहीं है। उन्होंने बसपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी अपने मूल वोटर यानी दलित समाज को ही भूल गई है। सपा सामाजिक न्याय के साथ सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि आगामी राजनीति में पीडीए की अवधारणा सामाजिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व का बड़ा आधार बनेगी।