बीएचयू के नए कुलपति ने प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने बृहस्पतिवार को अमर उजाला से बातचीत में कहा कि शोध कोई फैक्टरी का उत्पादन नहीं है जो तुरंत दिख जाए। इसमें समय लगता है। इसकी एक प्रक्रिया है। यदि निवेश किया गया है तो उसका लाभ मिलेगा। हो सकता है कि एक साल या फिर चार साल के बाद ही आए। एक समय ऐसा आएगा कि हर साल 10-10 रिसर्च पेपर नेचर जैसे जर्नल में छपेंगे। हालांकि कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने कई सवालों के जवाब में ये ही कहते नजर आए कि अभी मैं ये नहीं जानता या पहली बार सुन रहा हूं। यदि ऐसा है तो बातचीत की जाएगी। अप्रासंगिक कोर्स से बीएचयू की बिगड़ती छवि के सवाल पर चिंता जताई और कहा कि प्रक्रिया के तहत इन्हें चिह्नित कर हटाया जाएगा।