काशी में एक बांग्लादेशी मूल की मुस्लिम महिला अंबिया बानो ने अपने पूर्वजों द्वारा की गई भूल को सुधारते हुए पुनः सनातन धर्म को अख्तियार किया। अंबिया बानो से अंबिया माला बनी महिला अपने धार्मिक अनुष्ठान में 27 साल पहले गर्भ में मारी गई अपनी बेटी के मोक्ष की कामना के लिए काशी पहुंची और दशाश्वमेध घाट पर पिंडदान किया। पिंडदान का कर्मकांड काशी के प्रख्यात पुरोहितों के सानिध्य में पांच वैदिक ब्राह्मणों ने संपन्न कराया।