यूपी पंचायत चुनाव को लेकर तमाम सियासी दल बिसात बिछाने में जुट गए हैं.... भले ही चुनाव 2026 के अप्रैल-मई महीने में होने हैं....लेकिन राजनीतिक दल अभी से पूरी तैयारी में जुटे हैं...उसके पीछे वजह भी है..क्यों कि 2026 के पंचायत चुनाव को यूपी के सियासी दल 2027 विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल मानकर चल रहे हैं...यूपी के मुख्य सियासी दल भाजपा और सपा अपना अपना प्लान तैयार कर रहे हैं..सपा चुनाव को लेकर उत्साहित है..वो इसलिए क्यों कि 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा को उन्हीं सीटों पर जीत मिली थी...जो ग्रामीण अंचल की थी...जिससे बीजेपी को बड़ा झटका लगा था...तो वहीं इसी बात की चिंता बीजेपी को सता रही है...इसीलिए सत्ताधारी दल भी पंचायत चुनाव को 2027 का लिटमस टेस्ट मानकर चल रहा है.
सीएम योगी आदित्यनाथ ने पंचायत चुनाव में आरक्षण लागू कराने के लिए सभी जरूरी तैयारियां पूरी करने का निर्देश दिया है। इसके लिए छह सदस्यीय पिछड़ा वर्ग आयोग गठित करने का सुझाव दिया गया है, जो जनसंख्या आधारित डेटा तैयार करेगा। इस रिपोर्ट के आधार पर ही ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत की सीटों पर आरक्षण तय होगा.
विभागीय सूत्रों की मानें तो, प्रस्ताव पर कैबिनेट की मुहर के बाद आयोग का गठन होगा और फिर अक्टूबर तक आरक्षण की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रदेश सरकार के लिए पंचायत चुनाव में आरक्षण लागू कराना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
ग्राम सभाओं के नए परिसीमन के चलते कुल 512 ग्राम पंचायतें खत्म हुई हैं, जबकि 11 नई पंचायतों का गठन हुआ है। जहां वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव में 58195 ग्राम प्रधान चुने गए थे, वहीं अगले साल होने वाले चुनाव में 57694 ग्राम प्रधान बनेंगे। प्रदेश में अगले साल अप्रैल-मई में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। आरक्षण के निर्धारण से पहले ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन का काम पूरा हो चुका है।