प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल की जिला इकाई ने सोमवार को वाणिज्य कर विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा। औद्योगिक इकाइयों के गेट पर निगरानी का कड़ा विरोध जताया। जिलाध्यक्ष राजेश गुप्ता ने कहा कि औद्योगिक इकाइयों, विशेषकर पान मसाला, लोहे और अन्य व्यापार की बड़ी इकाइयों को इस व्यवस्था से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे आदेश से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश की औद्योगिक इकाइयों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इससे बेरोजगारी बढ़ेगी और अराजकता का माहौल पैदा होगा। उन्होंने कहा कि यह निगरानी केवल यूपी में लागू है, जबकि अन्य किसी भी प्रदेश में ऐसी व्यवस्था नहीं है। इससे "एक राष्ट्र, एक कर" की अवधारणा का पालन करने में कठिनाई होगी। प्रदेश पहले ही जीएसटी के तहत सर्वाधिक राजस्व प्रगति पर है। ऐसे में औद्योगिक इकाइयों पर शक की कोई गुंजाइश नहीं है। ज्ञापन में मांग की गई कि जनहित और व्यापार हित को ध्यान में रखते हुए इस अव्यवहारिक आदेश को तत्काल समाप्त किया जाए और ऐसे आदेशों को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।