दीपावली के त्योहार पर पूर्व के मुकाबले दीयों की बिक्री नहीं होती है। दीये खरीदने की अपेक्षा लोग सस्ती झालर खरीदकर रोशनी कर लेते हैं। ऐसे में कुंभकार के चाक की गति पर ब्रेक लग गया है। दीया विक्रेता राजू प्रजापति बताते हैं कि दो सौ रुपये सैकड़ा दीये का दाम खुलना चाहिए। बाजार में इतने में कोई लेता नहीं है। दुकान लगाने का स्थान तक मुश्किल से मिलता है। इसके चलते त्योहार पर बिक्री ठीक से नहीं हो पाती है। रोजा की मठिया कॉलोनी में रामकिशोर ने बताया कि प्रत्येक चीज के रेट बढ़ रहे हैं। मिट्टी के दीपक के दाम चार साल से नहीं बढ़े हैं। इसके चलते खर्च चलाना मुश्किल होता है। तालाबों और पोखर पाट दिए जाने से मिट्टी तक मिलना मुश्किल होती है। गोबर के कंडे व अन्य साधन काफी महंगे हो गए हैं।