पीलीभीत। पंजाब और पीलीभीत पुलिस के साझा ऑपरेशन में सोमवार को मारे गए खालिस्तान समर्थक तीनों आतंकियों के परिजन मंगलवार सुबह पीलीभीत में पोस्टमाॅर्टम हाउस पहुंचे। परिजनों का कहना था कि उनके बेटों का कभी मारपीट में भी नाम सामने नहीं आया। वे ऐसा नहीं कर सकते। चार दिन तक पंजाब पुलिस घर के आसपास तक नहीं आई। अचानक मुठभेड़ की सूचना मिली, जो भी हुआ वह यकीन से परे है।
मुठभेड़ में पंजाब के गुरदासपुर जिले के रहने वाले खालिस्तान समर्थक आतंकी वरिंदर सिंह, गुरविंदर सिंह व जसनप्रीत सिंह की मौत हुई थी। तीनों पर कलानौर थाने की बख्शीवाल पुलिस चौकी पर ग्रेनेड फेंकने आरोप था। मंगलवार को पोस्टमाॅर्टम हाउस पर मौजूद मृतक गुरुविंदर सिंह के पिता गुरदेव सिंह ने बताया कि उनका इकलौता बेटा 19 दिसंबर को घर से चप्पल और टीशर्ट पहनकर निकला था। इसके बाद उसका फोन बंद हो गया। चार दिन तक कोई जानकारी नहीं लगी। घर पर भी पुलिस नहीं आई। सोमवार को उसके मारे जाने की जानकारी मिली। उन्हें घटनाक्रम पर विश्वास नहीं हो रहा। दावा किया कि जिस दिन चौकी पर ग्रेनेड फेंकने की घटना हुई, उस दिन उनका बेटा घर पर ही था।
मृतक जसनप्रीत सिंह के पिता स्वरूप सिंह ने भी यही तर्क दिया। उन्होंने कहा कि उनका बेटा कभी पंजाब में नहीं घूमा तो यहां तक कैसे पहुंच गया। उन्होंने भी घटना के दिन बेटे के घर पर होने का दावा किया। बताया कि, 19 दिसंबर को ट्रक पर हेल्पर का कार्य करने की बात कहकर वह घर से निकला। इसके बाद सोमवार को मुठभेड़ की जानकारी मिली। कहा कि, उसका कोई भी अपराधिक इतिहास नहीं रहा। मृतक वरिंदर के जीजा गुरमीत सिंह ने बताया कि वरिंदर के अवैध गतिविधियों में शामिल होने की बात कभी सामने नहीं आई। न ही कोई अपराधिक इतिहास रहा। ऐसे में घटनाक्रम पर विश्वास नहीं हो रहा।
तीन माह पूर्व ही जसनप्रीत ने की थी लव मैरिज
जसनप्रीत के पिता स्वरूप सिंह ने बताया कि दो बेटियों और तीन बेटों में जसनप्रीत सबसे छोटा था। तीन माह पहले ही उसने अपनी मर्जी से लव मैरिज की थी। परिवार के साथ घर पर ही रह रहा था।
गरीब परिवारों के थे तीनों
मारे गए तीनों आतंकियों की परिवारिक स्थिति कमजोर है। उनके परिवार गरीब हैं। पोस्टमाॅर्टम हाउस पर मिले परिजनों ने कहा कि वे लोग मेहनत-मजदूरी कर परिवार को चला रहे हैं। बच्चे भी मेहनत मजदूरी ही करते थे। जसनप्रीत अशिक्षित था। वहीं वरिंदर और गुरवदिंर 12वीं पास थे। तीनों पांच किलोमीटर दायरे में स्थित अलग-अलग गांवों में रहते थे। तीनों में आपस में दोस्ती थी।
अतुल दीक्षित।