मुजफ्फरनगर। पदमश्री डॉ. सुभाष पालेकर ने रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से होने वाले नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह भूमि की उर्वरता घटाकर लागत बढ़ा रहा है, जबकि प्राकृतिक खेती किसानों के लिए वरदान है। उधर, भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि इससे किसानों को लाभ मिलेगा। किसान भवन में चार दिवसीय जीरो बजट कृषि कार्यशाला का समापन हुआ। आखिरी दिन पालेकर ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना मुख्य फसल है। हालांकि, किसान रासायनिक प्रयोगों से अपनी आजीविका की उत्पादन क्षमता कम कर रहे हैं। इससे आने वाली पीढ़ियों को भी नुकसान होगा। उन्होंने प्राकृतिक खेती को कम लागत में अधिक लाभकारी बनाने का मुख्य उद्देश्य बताया। इसमें देशी गाय के गोबर और गोमूत्र से बने जीवामृत, घनजीवामृत जैसे प्राकृतिक घोलों का उपयोग होता है। यह घोल मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं और फसलों को पोषण देकर उत्पादन में वृद्धि करते हैं। गन्ने की फसल में पौधों की पंक्तियों की दूरी चार फीट रखते हुए पंक्तियों के मध्य में लोबिया, उड़द, मूंग, कपास जैसी मिश्रित फसलें उगाना लाभकारी है। मिश्रित फसलों से भूमि में सुधार होता है और खानपान के लिए शुद्ध अनाज पैदा होता है। प्राकृतिक खेती की फसलें रसायन मुक्त और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं।