नया शैक्षिक सत्र आरंभ होने के साथ ही अभिभावकों के साथ-साथ स्कूलों के प्रधानाचार्यों के समक्ष भी नई चुनौतियां उत्पन्न हो गई हैं। कहीं पर फीस को लेकर विवाद है तो कहीं पर किताबों को लेकर। स्कूल प्रबंधन की आम शिकायत है कि उनका पक्ष लोगों के सामने नहीं आ पाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए बुधवार को अमर उजाला कार्यालय में संवाद का आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न स्कूलों के प्रधानाचार्यों ने अपनी बात रखी।एनसीईआरटी की किताबें चर्चा का प्रमुख बिंदु रहीं। ज्यादातर प्रधानाचार्यों का कहना था कि एनसीईआरटी की किताबें छात्रों को जानकारी देने के लिहाज से पर्याप्त नहीं हैं।